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Homeराज्य समाचारप्रकृति रक्षा, पर्यावरण चेतना और एकता का संदेश देगी राष्ट्रीय उत्तरायणी

प्रकृति रक्षा, पर्यावरण चेतना और एकता का संदेश देगी राष्ट्रीय उत्तरायणी

 

नई दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू में सुखी परिवार फाउंडेशन के कार्यालय में आज 22 वें राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव आयोजन समिति की बैठक संपन्न हुई।
उत्तरायणी आयोजन समिति की इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए सुखी परिवार फाउंडेशन के संस्थापक और सुप्रसिद्ध जैन संत डॉ.गणि राजेन्द्र विजय जी महाराज ने कहा कि उत्तरायण पर्व देश को आध्यात्मिक,सांस्कृतिक और सामाजिक सभी दृष्टि से एकाकार करता है। पर्वतीय लोकविकास समिति ने दो दशक से इस महापर्व को प्रकृति,पर्यावरण और राष्ट्रीय एकता से जोड़कर राष्ट्रीय अभियान बनाया है। ऐसे जनजागरण इसके आयोजन यदि समाज और सरकार सब ओर से सहयोग पाएं तो व्यापक संदेश जाएगा।
पर्वतीय लोकविकास समिति के परामर्शदाता CA राजेश्वर पैन्यूली ने कहा कि उत्तरायणी प्रकाश,ऊर्जा,ऊष्मा,उमंग,उत्साह और सकारात्मकता का पर्व है। धर्म,संस्कृति और राष्ट्र के विज़न के साथ इसकी व्यापक अवधारणा अनुकरणीय है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता नेपाल सिंह ने कहा कि उत्तरायणी अब उत्तराखंड का ही सर्वमान्य पर्व नहीं बल्कि देश का भी लोकप्रिय पर्व बन गया है।
सुखी परिवार फाउंडेशन के महासचिव तपन प्रकाश ने कहा कि उत्तरायणी के राष्ट्रीय अभियान को इस बार ल्युटियन जोन में चर्चित और भव्य बनाना है।
पर्वतीय लोकविकास समिति के अध्यक्ष और राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान के संयोजक प्रो.सूर्य प्रकाश सेमवाल ने कहा कि हमने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और दिल्ली सरकार के संस्कृति मंत्रालय को राष्ट्रीय उत्तरायणी की अवधारणा का प्रस्ताव महीने भर पूर्व भेज दिया था। 10 जनवरी को प्रेस क्लब में राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई है।

 

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