Homeराज्य समाचारपरमार्थ निकेतन पहुंचे सीएम धामी:  प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना

परमार्थ निकेतन पहुंचे सीएम धामी:  प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना

उत्तराखंड बनेगा योग और आयुष का ग्लोबल हब, प्रदेश में लागू देश की पहली योग नीति-2025

80 से अधिक देशों के साधकों के बीच मुख्यमंत्री बोले – “युद्धग्रस्त विश्व में योग ही शांति का एकमात्र मार्ग”

योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ को चरितार्थ करने वाला सार्वभौमिक विज्ञान: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित 38वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अवसर पर मां गंगा की भव्य आरती में सम्मिलित होकर पूजा-अर्चना की। विधानसभा के बजट सत्र के बीच सीधे ऋषिकेश पहुंचे मुख्यमंत्री ने मां गंगा से समस्त प्रदेशवासियों की सुख, शांति और चहुंमुखी समृद्धि के लिए मंगल कामना की।

9 से 15 मार्च तक चल रहे इस पावन अवसर पर ऋषिकेश की वैश्विक महत्ता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि योग नगरी ने न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व के मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान स्थापित की है। उन्होंने महोत्सव में 80 से अधिक देशों से पधारे पर्यटकों और योग साधकों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि ऋषिकेश आज अध्यात्म, योग और मानसिक शांति की खोज में जुटे दुनिया भर के लोगों की पहली पसंद बन चुका है। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संजोने पर विशेष बल दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने योग और आयुष के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए देश की ‘प्रथम योग नीति-2025’ लागू की है। इस नीति के तहत योग और ध्यान केंद्रों की स्थापना के लिए 20 लाख रुपए तक की सब्सिडी तथा शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु 10 लाख रुपए तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पाँच नए ‘योग हब’ स्थापित किए जा रहे हैं और आयुष एवं वेलनेस केंद्रों में योग सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। प्राकृतिक चिकित्सा को प्रोत्साहन देने का ही परिणाम है कि प्रदेश में 300 से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य केंद्र’ स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि प्रत्येक जनपद में 50 बेड के आयुष चिकित्सालयों की स्थापना की जा रही है। नागरिकों को सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने हेतु ‘ई-संजीवनी पोर्टल’ के माध्यम से 70 से अधिक विशेषज्ञ आयुष परामर्श दे रहे हैं। सरकार ‘उत्तराखंड आयुष नीति’ के माध्यम से औषधीय पौधों, वेलनेस शिक्षा और शोध के संवर्धन हेतु ठोस कदम उठा रही है। साथ ही, आयुर्वेदिक चिकित्सा, योग और आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए दोनों मंडलों में ‘स्पेशल इकोनॉमिक जोन’ की स्थापना की जा रही है, जिसके लिए 10 करोड़ रुपए के बजट का विशेष प्रावधान किया गया है।

​मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग मात्र एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन गौरवशाली विधा और एक ऐसा सार्वभौमिक विज्ञान है, जो मनुष्य के मन, शरीर और आत्मा के बीच उत्कृष्ट संतुलन स्थापित करता है। एक ‘नेचुरल वैल्यू सिस्टम’ के रूप में यह हमारे जीवन में मानसिक शांति का संचार करता है और आधुनिक समय की चुनौतियों के बीच मन एवं शरीर को पूर्णतः तनाव मुक्त रखने का सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि योग के माध्यम से न केवल एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह एक ऐसी शक्ति है जो जाति, भाषा, धर्म और भूगोल की तमाम सीमाओं को लांघकर संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में पिरोती है। ‘उदारचरितानाम् तु वसुधैव कुटुंबकम्’ के ऋषि-मुनियों के संदेश को योग ने आज पूरी दुनिया में चरितार्थ किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी प्रयासों से ही आज ‘विश्व योग दिवस’ के माध्यम से हमारी इस महान थाती को वैश्विक मान्यता मिली है।

​प्रदेश की आध्यात्मिक महत्ता का वर्णन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी यह पावन धरती केवल ‘देवभूमि’ ही नहीं, बल्कि योग, अध्यात्म और आयुष की भी महान संगम स्थली है। यह ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की वह पावन तपोभूमि है, जिन्होंने सदियों तक यहाँ साधना कर संपूर्ण मानवता को कल्याण का मार्ग दिखाया है। वर्तमान सरकार के निरंतर प्रयासों से उत्तराखंड को ‘योग की वैश्विक राजधानी’ के रूप में सुदृढ़ता से स्थापित किया जा रहा है, ताकि विश्व भर से शांति और स्वास्थ्य की खोज में आने वाले साधकों को यहाँ एक श्रेष्ठ वातावरण उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आज के युद्धग्रस्त विश्व में योग ही मानवता के लिए शांति का एकमात्र मार्ग है।

महोत्सव की संध्या को और भी दिव्य बनाते हुए सुप्रसिद्ध गायक पद्मश्री कैलाश खेर ने अपनी सुरीली और भक्तिमयी प्रस्तुतियों से वहां उपस्थित समस्त जनसमूह का मन मोह लिया। उनकी मधुर आवाज और आध्यात्मिक भजनों ने गंगा घाट के वातावरण को पूरी तरह शिवमय और भक्ति के रस में सराबोर कर दिया।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, एसएसपी सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत सहित भारी संख्या में विदेशी पर्यटक एवं स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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