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मैदान की धूल से नेशनल के सिंहासन तक: कोटद्वार की ‘हॉकी वारियर्स’ अब रांची में दिखाएंगी अपने हुनर का प्रदर्शन

 

कोटद्वार (कण्वनगरी):
इतिहास गवाह है कि जब-जब पहाड़ की बेटियों ने अपनी ताकत का एहसास कराया है, दुनिया ने झुककर उन्हें सलाम किया है। कोटद्वार के मिनी स्टेडियम मोटाढाक की साधारण सी दिखने वाली जमीन ने आज वो चमत्कार कर दिखाया है, जिसने पूरे उत्तराखंड को गर्व से उन्मादित कर दिया है।
छह बेटियां, एक लक्ष्य: अभावों की छाती पर पैर रखकर ‘नेशनल टीम’ में मारी धाकड़ एंट्री; अब पूरे देश की नजरें इन पर!
जी.जी.आई.सी. घमंडपुर की छह ‘ प्रतिभावान खिलाड़ियों’ ने अपनी मेहनत के दम पर उत्तराखंड की राष्ट्रीय अंडर-17 हॉकी टीम का दरवाजा तोड़कर अपना हक छीन लिया है।
ये बेटियां आगामी 24 जनवरी से 4 फरवरी तक रांची (झारखंड) के मैदान पर उत्तराखंड की अस्मत और उम्मीदों के लिए अपनी जान झोंक देंगी।
इनके हाथों में है विजय की मशाल:
ये वो नाम हैं जिन्होंने साबित किया कि शेरनियां केवल जंगलों में नहीं, खेल के मैदानों में भी राज करती हैं:
* निकिता (पुत्री श्री भूम प्रकाश भट्ट)
* अक्षिता नेगी (पुत्री श्री रतन सिंह नेगी)
* अंकिता रावत (पुत्री श्री सुनील सिंह रावत)
* गुंजन (पुत्री श्री शिवा कुमार)
* पीहू रावत (पुत्री श्री जयपाल सिंह रावत)
मिनी स्टेडियम मोटाढाक के हॉकी कोच के सानिध्य में तेजेन्द्र रावत कठिन परिश्रम एवं लगन के बल पर खिलाड़ियों को खेल की बारीकियों से अवगत करवाने से लेकर उनके खेल में निरंतर सुधार के लिए सदैव संघर्षशील रहते है । आज उनके धैर्य लगन का परिणाम है कि कोटद्वार की बालिकाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेगी ।
जब लोग बिस्तर की गर्मी में सो रहे होते थे, तब कड़ाके की ठंड में ओस की बूंदों के बीच कोच तेजेन्द्र रावत इन बेटियों को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार कर रहे थे। पिछले दो वर्षों का एक-एक पल, एक-एक आंसू और एक-एक कतरा पसीना आज ‘नेशनल जर्सी’ की शान बन चुका है। यह सफलता उन तमाम तानों और बाधाओं को एक करारा तमाचा है जो बेटियों के पैरों में बेड़ियां डालना चाहते थे।
मीडिया प्रभारी शिवम नेगी का प्रेरणादायी संदेश:
> “ये बेटियां केवल खेलने नहीं जा रही हैं, ये उत्तराखंड के स्वाभिमान का झंडा गाड़ने जा रही हैं। इनके पास सुविधाओं के महल नहीं थे, लेकिन इनके पास वो जिगर है जो हिमालय से भी ऊंचा है। रांची का मैदान गवाह बनेगा कि जब कोटद्वार की बेटियां मैदान पर उतरती हैं, तो विरोधियों के पैर जमीन छोड़ देते हैं। ये जीत उन हर लड़कियों के लिए एक ललकार है जो सपने देखने से डरती हैं। उठो! और देखो, तुम्हारी अपनी बहनें दुनिया जीतने चली हैं!”
>
कोटद्वार की हुंकार: ‘विजयी भव’
पूरा शहर आज एक परिवार बन गया है। कोटद्वार का हर रास्ता इन बेटियों की जीत की दुआओं से गूंज रहा है।
खेल संगठनों ने गर्व से कहा है— “बेटियों, जाओ और तिरंगे की शान बढ़ाओ, हम तुम्हारी जीत के स्वागत के लिए पलकें बिछाए खड़े हैं!”
हुंकार हमारी, जीत तुम्हारी! जय देवभूमि, जय उत्तराखंड!
शिवम नेगी
मीडिया प्रभारी, कोटद्वार

 

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