विश्वशांति का नाद : लेखक गांव के साथ
डॉ रमेश पोखरियाल ‘ ‘निशंक जी की अध्यक्षता, विदुषी निशंक एवं जर्मनी से डॉ शिप्रा शिल्पी के संयोजन में हुआ “एक शाम: विश्व शांति के नाम” संगोष्ठी का भव्य आयोजन।
वैश्विक परिदृश्य में विश्व शांति की कामना के उद्देश्य से लेखक गांव, सृजनी ग्लोबल एवं VHSS वैश्विक हिन्दीशाला संस्थान,( यूरोप) के संयुक्त तत्वावधान में “एक शाम : विश्वशांति के नाम “ भव्य संगोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन किया गया।
माननीय डॉ रमेश पोखरियाल ‘ ‘निशंक ‘ जी (पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार एवं संस्थापक लेखक गाँव) की अध्यक्षता में, सुश्री विदुषी निशंक ( निदेशक, लेखक गाँव) के संरक्षण में एवं डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना(संस्थापक: सृजनी एवं VHSS यूरोप, अंतरराष्ट्रीय प्रवासी संयोजक,लेखक गांव, जर्मनी ) के संयोजन में आयोजित की गई इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में देश विदेश के नवोदित प्रतिभाशाली बच्चों, युवा लेखकों एवं सुप्रतिष्ठित वरिष्ठ प्रवासी लेखको ने प्रतिभागिता की।
माननीय निशंक जी ने सभी की रचनात्मक प्रतिभाओं को नमन करते हुए कहा, विश्वशांति आज अत्यंत महत्वपूर्ण एव समसामयिक विषय है। डॉ शिप्रा एवं लेखक गांव द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी अनेक मायनों में अत्यन्त विशिष्ट है। यह विश्व में प्रेम, सद्भाव, युद्ध के दुष्प्रभावों की बात तो करती ही है साथ ही कुवैत , दुबई, कतर जैसे युद्धरत देशों के वर्तमान जनजीवन पर पड़ रहे प्रत्यक्ष दर्शी प्रभावों और ऐसे समय में घबरा कर नहीं सजग रहकर कैसे विकट परिस्थितियों सामना किया जाए इसकी भी राह सुझाती है।
डॉ शिप्रा ने कहा युद्ध विध्वंसकारी होते है, समाधान कभी नहीं। साहित्य में वो शक्ति है जो समाज और सोच में परिवर्तन ला सकती है। युद्ध पर नहीं, विश्वशांति पर बात होनी ही चाहिए।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में माननीय डॉ रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा लिखित एवं नवोदित एवं प्रवासी लेखकों द्वारा स्वरचित कविताओं का पाठ एवं वैश्विक परिस्थितियों पर प्रवासियों के विचार एवं अनुभवो को साझा किया गया।
नवोदित लेखकों में श्रेया चुग, साक्षी गुप्ता, भव्या भगत, कविशा वर्मा, श्रेयल पटनायक, लव्या कुशवाहा, इंदु पार्सवान,अनुष्का ठाकुर, वंशिका नेगी, आयुषी ज्वाल, चैतन्य , वृंदा वाणी, सीरत अरोड़ा, प्रनवी भारद्वाज, सार्थक चमोली ने जहां अपने सशक्त काव्यपाठ से दर्शकों एवं श्रोताओं को सम्मोहित कर लिया।
वहीं सुप्रतिष्ठित वरिष्ठ प्रवासी लेखकों आदरणीया मृदुल कीर्ति (अमेरिका), रेखा राजवंशी (आस्ट्रेलिया) विवेक मणि त्रिपाठी(चीन), प्राची चतुर्वेदी रंधावा(कनाडा), शालिनी वर्मा जी(कतर), संगीता चौबे पंखुड़ी जी (कुवैत), इंदु बरोट जी, (यूके) शुभ्रा ओझा जी(अमेरिका) अनु बाफना जी(दुबई) मनीष पांडेय मनु जी(नीदरलैंड) पंखुड़ी भटनागर जी (जर्मनी) रश्मि त्रिवेदी जी(जर्मनी), मंजू श्रीवास्तव (अमेरिका) डॉ नागौद वितन (श्री लंका)भारत से वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार पंकज शर्मा, प्रो. किरन खन्ना, नमिता राकेश एवं डॉ बैचेन कंडियाल
ने अपने देशों की वर्तमान परिस्थितियों पर गहन चर्चा करते हुए सार्थक, विषय प्रासंगिक एवं संवेदनशील कविताओं का पाठ करके सभी को मंत्रमुग्ध कर लिया।
कार्यक्रम में डॉ बेचैन कंडियाल के सुन्दर स्वागत उद्बोधन ने, डॉ शिप्रा सक्सेना एवं आशना कंडियाल नेगी के प्रभावी संचालन ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम की संकल्पना में पूजा पोखरियाल का भी विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में श्रीमती मोनिका शर्मा ने अपनी सुमधुर वाणी में सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
ज्ञातव्य हो 65 से भी अधिक देशों के दर्शकों एवं प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से संगोष्ठी में प्रतिभागिता की एवं सभी प्रतिभागियों के विचारों की भूरि भूरि प्रशंसा की।
