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कुमाऊँ की महिलाओं, देवी-देवताओं और लोकसंस्कृति पर अपमानजनक बयान: सामाजिक बहिष्कार की की मांग

 

महिला ब्लॉगर द्वारा कुमाऊं की महिलाओं और लोक संस्कृति पर दिए गए अपमानजनक बयान पर भारी आक्रोश

हल्द्वानी : एक महिला द्वारा कुमाऊं की महिलाओं देवी -देवताओं एवं पारंपरिक लोक संस्कृति पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर भारी आक्रोश पैदा हो गया है। अपने आप को “ज्योति अधिकार” बताने वाली‌ जो की एक महिला ब्लॉगर भी है उनके द्वारा कुमाऊँ की महिलाओं, देवी-देवताओं और पारंपरिक लोकसंस्कृति को लेकर दिए गए आपत्तिजनक और अपमानजनक बयानों से पूरे कुमाऊँ क्षेत्र में आक्रोश पैदा हो गया है। इन बयानों को कुमाऊँ की नारी अस्मिता, देवभूमि की आस्था और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत पर सीधा हमला माना जा रहा है। जिसको लेकर काफी विरोध हो रहा है।

कुमाऊँ की महिलाएं एवं लोक संस्कृति केवल किसी उत्सव या कौतिक का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वह पहाड़ की आत्मा हैं। लोकनृत्य, पारंपरिक वेश-भूषा और देवी-देवताओं की आस्था से जुड़ी परंपराओं को जीवित रखने में कुमाऊँ की नारियों की भूमिका ऐतिहासिक रही है। ऐसे में कौतिकों में नृत्य करने वाली महिलाओं और पहाड़ी संस्कृति को लेकर अशोभनीय शब्दों का प्रयोग करना न केवल महिलाओं का अपमान है, बल्कि देवभूमि की आस्था के साथ खिलवाड़ भी है।

महिला द्वारा देवी-देवताओं और लोकआस्थाओं को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों में भी भारी आक्रोश है। कुमाऊँ देवभूमि है, जहां लोकदेवताओं की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। इन आस्थाओं को “फर्जी” बताना करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।

सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, महिला संगठनों और सामाजिक संस्थाओं का स्पष्ट कहना है कि इस तरह की भाषा और मानसिकता रखने वालों को कुमाऊँ के सांस्कृतिक मेलों, कौतिकों और सामाजिक आयोजनों से दूर रखा जाना चाहिए। कई संगठनों ने ऐसे व्यक्ति के सामाजिक और सांस्कृतिक बहिष्कार की मांग उठाई है और कहा है कि लोकसंस्कृति को बदनाम करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समाज का यह भी आरोप है कि पहाड़ की पीड़ा, महिलाओं के संघर्ष और संस्कृति के नाम पर निजी प्रचार और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। कुमाऊँ की जनता ने साफ संदेश दिया है कि यहां की संस्कृति किसी की बपौती नहीं है और न ही महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों को चुपचाप स्वीकार किया जाएगा।

कुमाऊँ का समाज अपनी पहचान शालीनता, सम्मान, आस्था और सांस्कृतिक गौरव से करता है। इस पहचान पर हमला करने वाले किसी भी प्रयास का जवाब एकजुट होकर, लोकतांत्रिक तरीके से और सामाजिक चेतना के साथ दिया जाएगा।

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