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डीएम टिहरी ने लखवाड़ बाँध परियोजना के संबंध में ली बैठक: अधिकारियों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश 

 

नैनबाग (शिवांश कुंवर)

नई टिहरी। जिला सभागार नई टिहरी में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में लखवाड़ बाँध बहुउद्देशीय परियोजना के संबंध में बैठक आहूत की गई। जिलाधिकारी ने एडीएम को माह में एक बार तथा एसडीएम को सप्ताह में एक बार आवश्यक रूप से साइट विजिट करने को कहा।

इस मौके पर विधायक धनोल्टी प्रीतम सिंह पंवार भी मौजूद रहे। उन्होंने क्षेत्रीय लोगों को अलग-अलग समितियों को खत्म कर एक मंच पर आने की बात कही।

बैठक में परियोजना हेतु भूमि अधिग्रहण का व्यवसायिक दर पर चार गुना मुआवजा देने, प्रभावित परिवारों को 40 स्थाई पदों पर नौकरी देने, परियोजना के तहत 70 प्रतिशत रोजगार में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने तथा नियमों में शिथिलीकरण, हटाये गये युवाओं को वापस लेने, कूणा एवं रणोगी गांव के विस्थापन करने आदि अन्य मांगों पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिये गये।

बैठक में समझौते के आधार पर निर्णय लिये गये कि कैम्पटी में भूमि अधिग्रहण से संबंधित जो धनराशि जिलाधिकारी के पास आ चुकी है और जिनके अभिलेख जमा हो चुके हैं, उन्हें अगले सप्ताह से रोस्टरवाइज धनराशि वितरित करना शुरू कर दिया जायेगा तथा अन्य हेतु शासन को भेजा जायेगा। 40 स्थाई पदों पर नौकरी दिये जाने के संबंध में ईडी यूजेवीएनएल ने बताया कि धारा-11 के प्रकाशन हेतु शासन को भेजा गया है, उसके बाद ही प्रक्रिया शुरू हो पायेगी। इस पर निर्णय लिया गया कि धारा-11 के तहत आने वाले प्रभावितों को प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाये।

बैठक में एल एण्ड टी के अधिकारी ने बताया कि परियोजना के तहत 70 प्रतिशत रोजगार उत्तराखण्ड के लोगों को दिया जाता है, जिस पर बांध प्रभावितों ने स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने तथा नियमों मंे शिथिलीकरण की मांग की। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारी को कम्पनी की मांग के अनुसार कुशल/अकुशल युवाओं को टेªेनिंग देते हुए पारदर्शिता के साथ स्थानीय लोगों को वरीयता देने को कहा। सरकारी सम्पत्ति पर काफी समय से काम कर रहे काश्तकारी मुआवजा देने को लेकर जिलाधिकारी ने कहा कि प्रकरण शासन को भेजा गया है। इसके साथ ही 1960 से 90 के बीच के ऐसे पट्टेधारक जिनके अभिलेख नही मिल पा रहे हैं, उसकी जांच कर एसओपी बनाने की बात कही गई।

लखवाड़ बांध प्रभावित काश्तकार संघर्ष समिति के सदस्यों ने परियोजना निर्माण के दौरान कम्पनी द्वारा विवाद के चलते हटाये गये युवाओं को वापस लेने का अनुरोध किया, जिस पर बैठक कर आपसी सहमति से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सशर्त युवाओं को वापस रखने की बात कही गई। बैठक में अवगत कराया गया कि कूणा एवं रणोगी गांव के विस्थापन हेतु भूखण्ड को जमरानी पॉलिसी के तहत दिये जाने की मांग को लेकर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। परियोजना मंे स्थानीय वाहन को एक निश्चित निर्धारित दर दिये जाने को लेकर जिलाधिकारी ने आरवीएनएल से रेट चैक करवाने की बात कही।

इसके साथ ही आर एण्ड आर के तहत छूटे परिवारांे का सप्लीमेंट्री सर्वे करने, नई अधिग्रहण भूमि का आर एण्ड आर के तहत प्रतिकर देने, परिसम्पत्तियों के सत्यापन की सूची उपलब्ध कराने, जलमग्न हो रही परिसम्पित्तियों हेतु सीएसआर मद से काम करवाने, बांध बनने के बाद भविष्य में स्थानीय लोगों को रोजगार हेतु जगह देने, काश्तकार की 50 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहण होने पर पूर्ण विस्थापन में रखने आदि अन्य मांगे की गई।

बैठक में एसडीएम धनोल्टी नीलू चावला, तहसीलदार वीरम सिंह, लखवाड़ बांध प्रभावित काश्तकार संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. विरेन्द्र सिंह रावत, एल. एण्ड टी. लि. से एच.आर. हैड एवं प्रोजेक्ट मैनेजर विश्वमोहन श्रीवास्तव, उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि. (यू.जे.वी.एन.एल.) के अधिशासी निदेशक राजीव कुमार अग्रवाल, महाप्रबन्धक सुजीत कुमार सिंह, उप महाप्रबन्धक शिव दास, अधिशासी अभियन्ता विपिन डंगवाल, सहायक अभियन्ता विजेन्द्र सजवाण सहित अन्य संबंधत अधिकारी एवं काश्तकार उपस्थित रहे ।

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