बैठक में श्रम, गृह, स्वास्थ्य, कारागार और वन विभाग से जुड़े अहम निर्णय लिए गए
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में कुल 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी मुख्यमंत्री सचिव शैलेश बगौली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। बैठक में श्रम, गृह, स्वास्थ्य, कारागार और वन विभाग से जुड़े अहम निर्णय लिए गए, जिनका सीधा असर कर्मचारियों, श्रमिकों और आम जनता पर पड़ेगा।
सबसे अहम निर्णय श्रम विभाग से संबंधित रहा। राज्य सरकार ने कोविड काल में लागू किए गए पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020 को वापस लेने का फैसला किया है। यह प्रावधान उद्योगों में सरप्लस होने की स्थिति में ही बोनस देने की व्यवस्था करता था। चूंकि केंद्र सरकार का पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 पहले से प्रभावी है और राज्य का प्रस्ताव राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त नहीं कर सका, इसलिए अब केंद्रीय कानून को ही लागू रखने का निर्णय लिया गया है। इससे कर्मचारियों को
बोनस मिलने का रास्ता साफ होगा।
दैनिक श्रमिकों के कुल 893 पदों में से 304 श्रमिकों को न्यूनतम वेतन मिल रहा था, जबकि 589 श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब सरकार ने सभी पात्र श्रमिकों को ₹18,000 न्यूनतम वेतन देने का निर्णय लिया है।
बैठक मेें ESI डॉक्टरों की नियमावली और उत्तराखंड एम्प्लॉयी स्टेट सर्विस स्कीम 2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत ईएसआई में कुल 94 नए पद सृजित किए जाएंगे। इनमें 76 मेडिकल ऑफिसर, 11 असिस्टेंट डायरेक्टर, लेवल-12 के 6 पद और लेवल-13 का एक एडिशनल डायरेक्टर पद शामिल है। साथ ही मेडिकल ऑफिसर के प्रमोशन पदों को पहली बार व्यवस्थित किया गया है।
गृह विभाग के प्रस्ताव के तहत वर्ष 2022 में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को और मजबूत किया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर 22 नए पद सृजित होंगे, जिनमें एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सहित अन्य पद शामिल हैं।
कारागार विभाग में 2024 में पारित उत्तराखंड कारागार एक्ट में संशोधन करते हुए आदतन अपराधियों की परिभाषा को पूर्व कानून के अनुरूप लागू करने का निर्णय लिया गया है।
वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों को भी राहत मिली है। कुल 893 श्रमिकों में से शेष 589 को न्यूनतम वेतनमान देने की मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के साथ राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना को भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है। जब तक केंद्र की योजना 2025-26 तक प्रभावी रहेगी, तब तक राज्य की योजना भी समानांतर रूप से संचालित की जाएगी।
