सीएम धामी ने मातृशक्ति का किया अभिनंदन कहा मातृशक्ति राष्ट्र निर्माण की धुरी
सीएम धामी ने सात महिलाओं को दिया ‘सप्त मातृ शक्ति सम्मान’
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में विश्वमांगल्य सभा के तत्वावधान में आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ में मातृशक्ति का अभिनंदन किया। इस अवसर पर कम धामी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट कर।



सीएम धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च एवं सर्वप्रथम है। मातृशक्ति परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की वास्तविक धुरी है।
मुख्यमंत्री ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की नींव पर खड़ा है। साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखना और उन्हें साकार करने का संकल्प ही अपने व्यक्तित्व की असली ताकत बनाया।
उन्होंने कहा कि साधारण जीवन शैली में ने उन्हें जमीन से जुड़े रहने की सीख दी संयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना ने उन्हें उनके विचारों और निर्णय को आकार दिया उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवन में ऊंचा पद दिया प्रतिष्ठा नहीं बल्कि मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही महान व्यक्ति को महान बनाता है
सीएम धामी ने कहा कि माता द्वारा दिए गए संस्कार व्यक्ति के चरित्र और विचारों की आधारशिला होते हैं। प्रभु राम, भगवान कृष्ण और छत्रपति शिवाजी के जीवन में भी माताओं की भूमिका निर्णायक रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती व्यस्तता के कारण परिवारों के बीच संवाद कम हुआ है और संयुक्त परिवारों का स्वरूप कमजोर पड़ा है। ऐसे समय में ‘कुटुंब प्रबोधन’ की अवधारणा अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि परिवार ही बच्चों की पहली पाठशाला होता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने और मातृशक्ति की भूमिका को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
कम धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च है मात्र शक्ति को परिवार की दूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और यदि परिवार सशक्त होगा तो समाज और राष्ट्र भी सशक्त होंगे होंगे उन्होंने विश्व मंगल है सभा द्वारा मात्र शक्ति और पारिवारिक मूल्य को रेखांकित करने के निरंतर प्रयासों की सहारा ना की तथा सभी कार्यकर्ताओं और जुड़ी हुई महिला मात्र शक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि सेवा मानव जीवन का मूल संस्कार है और परिवार ही सेवा, समर्पण और संवेदना की पहली पाठशाला है। उन्होंने कहा कि मां समाज निर्माण की आधारशिला है, जो बच्चों में संस्कार, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का विकास करती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एकल परिवारों के बढ़ने और व्यस्त जीवनशैली के कारण पारिवारिक संवाद कम हुआ है। ऐसे में परिवारों को सेवा और संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाना होगा, ताकि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार हो सकें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘सप्त मातृ शक्ति सम्मान’ के तहत ममता राणा, ममता रावत, शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, राजरानी अग्रवाल, मंजू टम्टा और कविता मलासी को सम्मानित किया।
इस दौरान कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई महिलाएं उपस्थित रहीं।
