देहरादून लॉ कॉलेज के पूर्व छात्र ने छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा में 16 वां रैंक हासिल कर जज बनकर किया नाम रोशन
लॉ कॉलेज देहरादून के पूर्व छात्र ने छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा में हासिल की 16 वीं रैंक: लॉ कॉलेज में हुआ भव्य स्वागत
देहरादून 2 मार्च। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज और देहरादून में आज छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा में 16 वां रैंक पाकर जज बने काॅलेज के पूर्व छात्र रौशन कुमार पाठक का भव्य स्वागत किया गया। विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र जोशी जी ने रौशन को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया और उन्हे स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होने कहा कि रौशन ने अपनी उपलब्धि से न केवल अपना व अपने परिवार का बल्कि उत्तरांचल विश्वविद्यालय का भी नाम रोशन किया है। उन्होने छात्रों का उसका अनुसरण करने की सलाह दी।



विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो0 राजेश बहुगुणा ने बताया कि लाॅ काॅलेज देहरादून से शिक्षा लेकर देश के 15 राज्यों में छात्र जज बन चुके है। उत्तराखण्ड में सर्वाधिक 16 छात्र जज बनने में सफल हुए। उन्होने कहा कि 3 वर्ष की अनिवार्य प्रेक्टिस की बाध्यता ने छात्रों को विशेष कर लड़कियों को हतोत्साहित किया है।
अपने सम्बोधन में रौशन पाठक ने न्यायिक सेवा परिक्षा के गुर सिखाते हुए कहा कि प्री के लिए बेयर एक्ट से मेन के लिए पुस्तकों से और साक्षत्कार के लिए लाॅ के साथ-साथ सामान्य ज्ञान की पढ़ाई करना सर्वधिक लाभकारी होता है। उन्होने लाॅ काॅलेज की टिचिंग मैथडोलौजी, लाइब्रेरी कल्चर व मूटकोर्ट तथा डिबेट के वातावाण को अपनी सफलता में अहम योगदान माना। उन्होने कहा कि नियमित कक्षा में आने वाले प्रतिभागियों को किसी कोचिंग की आवश्यकता नही होती। अलबत्ता उन्होने मुख्य परीक्षा हेतु टेस्ट सिरिज ज्वाइन करने की सलाह दी उन्होने न्यायिक सेवा की सफलता के लिए सबसे बड़ी चुनौति धैर्य को माना। उन्होने कहा कि आज के परिपेक्ष में जहाँ एक और न्यायिक सेवा में रिक्तियां बहुत कम है तो वहीं दूसरी ओर 3 वर्ष की कोर्ट पे्रक्टिस की आवश्यकता और लम्बी चयन प्रक्रिया हर स्टेज की परीक्षा लेते है।
कार्यक्रम में काॅलेज की कम्पटिशन सेल से जुडे सैकड़ो छात्र-छात्राओं व शिक्षकों ने भागीदारी की।
