दून चिकित्सालय से स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण रोस्टर जारी
देहरादून। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को लेकर केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल करने का फैसला किया है। इसके क्रियान्वयन की दिशा में देश-भर में तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण का रोस्टर भी जारी कर दिया गया है, जिससे कार्यक्रम के शीघ्र शुभारंभ के संकेत मिल रहे हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की प्राचार्या डॉ. गीता जैन के अनुसार HPV एक अत्यंत सामान्य वायरस है, जो आगे चलकर महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर का कारण बन सकता है। यह कैंसर भारत में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। HPV वैक्सीन बीमारी होने से पहले सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे कैंसर का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकारी योजना के तहत HPV वैक्सीनेशन का मुख्य लक्ष्य 9 से 14 वर्ष की किशोरियाँ होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी आयु वर्ग में वैक्सीन का प्रभाव सबसे अधिक होता है। राष्ट्रीय स्तर पर इस वैक्सीन के शामिल होने से देश के दूरदराज़ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक भी इसकी पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी।
वर्तमान में HPV वैक्सीन प्राइवेट सेक्टर में उपलब्ध है, जबकि कुछ राज्यों और चिकित्सा संस्थानों में इसे निःशुल्क या रियायती दरों पर भी दिया जा रहा है। लेकिन राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत इसके शामिल होने से यह वैक्सीन व्यापक रूप से सुलभ हो सकेगी।
उत्तराखंड में भी इस फैसले को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क और सक्रिय है। दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता जैन ने बताया,
“9 से 14 वर्ष की उम्र में HPV वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है। शादी के बाद भी यह वैक्सीन दी जा सकती है, लेकिन पहले देने से सुरक्षा कहीं अधिक मिलती है। यह वैक्सीन सुरक्षित है और दुनिया के कई देशों में वर्षों से सफलतापूर्वक दी जा रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि HPV वैक्सीनेशन को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि भ्रांतियों और झिझक को दूर किया जा सके। सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किया जाना महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों तथा उससे होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलेगी।
