देहरादून/ चमोली : पूर्व कांग्रेस विधायक और बद्रीनाथ से भाजपा में शामिल हुए राजेंद्र भंडारी अब अपनी पार्टी बदलने के फैसले पर शंका जता रहे हैं। जनता की नाराजगी और चुनावी हार ने उनके मन में साफ तौर पर पछतावे की भावना पैदा कर दी है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजेंद्र भंडारी को अब ऐसा लग रहा है कि उन्होंने भाजपा में जाकर गलती कर दी। “जनता नाराज है, मुझे चुनाव हराकर सबक सिखाया” — ये सब बातें राजेंद्र भंडारी की शंकाओं को जाहिर कर रही हैं।
नेता आगे बोले, “अब ये शंकाएं क्या हो सकती हैं, ये आप सब बेहतर जानते हैं।” उनका इशारा साफ है कि भाजपा में जाने के बाद भंडारी को न तो अपेक्षित सम्मान मिला और न ही जनता का समर्थन। बद्रीनाथ उपचुनाव में हार के बाद अब उनकी पत्नी रजनी भंडारी भी पंचायत चुनाव में हार चुकी हैं। दो बड़े झटके लगने के बाद भंडारी परिवार की सियासी ताकत पर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि भंडारी अब अंदर ही अंदर पछता रहे हैं। भाजपा में जाने के वक्त तो उन्हें लगा था कि पीएम मोदी की लहर और पार्टी की ताकत उन्हें मजबूत बनाएगी, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। जनता ने उन्हें साफ संदेश दे दिया — “निकाला हुआ माल” नहीं, बल्कि “घर का माल” ही सबसे अच्छा होता है।
यह बयान उत्तराखंड की सियासत में तीखी बयानबाजी का नया अध्याय जोड़ रहा है। भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस इसे अपनी बड़ी नैतिक जीत बता रही है।
