हरियाणा के करनाल जिले के सालवन गांव में एक अनोखी और मिसाल पेश करने वाली शादी देखने को मिली। यहां युवक एडवोकेट ने बिना दहेज के विवाह कर समाज को एक बड़ा संदेश दिया। इस शादी में न बारात निकाली गई, न गहने-सामान लिया गया शगुन के रूप में केवल 1 रुपया लिया गया।
दूल्हे के पिता युधिष्ठिर सालवन ने बताया कि इस शादी में दिखावे और फिजूलखर्ची से पूरी तरह परहेज किया गया। बारात में केवल 11 लोग ही शामिल हुए और विवाह बहुत ही सादगी से संपन्न हुआ। परिवार का कहना है कि बेटियों को बोझ नहीं समझना चाहिए और समाज को दहेज प्रथा के खिलाफ आगे आना चाहिए।
दूल्हे ने कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता से साफ कह दिया था कि शादी में किसी तरह का दहेज नहीं लिया जाएगा। उनकी दुल्हन सिर्फ एक जोड़ी कपड़ों में ही ससुराल आई। उन्होंने कहा कि शादी प्यार और विश्वास का रिश्ता है, इसमें दहेज या दिखावे की कोई जरूरत नहीं होती।
दुल्हन ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि अगर हर परिवार ऐसा सोचने लगे तो कोई भी बेटी अपने पिता पर बोझ नहीं बनेगी।
परिवार ने सभी युवाओं से अपील की है कि वे आगे आएं और बिना दहेज की शादी कर समाज में एक नई मिसाल कायम करें, ताकि दहेज जैसी कुप्रथा को खत्म किया जा सके।
देहरादून (शिवांश कुंवर)
