देहरादून की रायपुर विधानसभा से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ द्वारा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा के कार्यालय में अपने समर्थकों एवं हिस्ट्रीशीटरों के साथ घुसकर अभद्र व्यवहार, बहस और हाथापाई किए जाने की घटना अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाली है, यह कहना है उत्तराखंड कांग्रेस की नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी का। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में निदेशक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला है।
गरिमा ने कहा कि यह घटना न केवल एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की गरिमा पर आघात है, बल्कि पूरे शासन-प्रशासन के मनोबल को गिराने वाली है। जब जनप्रतिनिधि स्वयं कानून हाथ में लेकर इस प्रकार की हिंसक कार्रवाई करें, तो आम जनता से कानून के पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
दसौनी ने आईना दिखाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। यदि सत्ता पक्ष के विधायक ही सरकारी कार्यालयों में घुसकर मारपीट करेंगे, तो यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार का संरक्षण अपराधियों को प्राप्त है। यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति है।
दसौनी ने कहा कि हम मांग करते हैं कि:
1. उक्त विधायक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए।
2. घटना में शामिल सभी असामाजिक तत्वों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाए।
3. घायल निदेशक को समुचित उपचार एवं सुरक्षा प्रदान की जाए।
4. मुख्यमंत्री इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से जवाब दें और प्रदेश की जनता से माफी मांगें।
प्रदेश की जनता सब देख रही है। सत्ता का दुरुपयोग और प्रशासन पर दबाव बनाने की राजनीति अब अधिक दिनों तक नहीं चलेगी। लोकतंत्र में कानून सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
गरिमा मेहरा दसौनी
उत्तराखंड कांग्रेस
