कृत्रिम बुद्धिमत्ता के फायदे और चुनौतियों पर विद्यार्थियों ने किया मंथन
एआई के बढ़ते प्रभाव पर छिड़ी बहस, विद्यार्थियों ने पक्ष-विपक्ष में रखे दमदार तर्क
तकनीक के दौर में एआई की भूमिका पर माया देवी विश्वविद्यालय में वाद-विवाद प्रतियोगिता
माया देवी विश्वविद्यालय में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन


‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता: मानवता के लिए वरदान या अभिशाप*
माया देवी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी द्वारा विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में *‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): मानवता के लिए वरदान या अभिशाप’ विषय पर विश्वविद्यालय स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया*। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के डीन एवं प्राध्यापक प्रो. महेंद्र सिंह पाल के नेतृत्व में किया गया।
*कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक एवं आलोचनात्मक चिंतन, प्रभावशाली वक्तृत्व कला, विश्लेषणात्मक क्षमता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तेजी से विकसित होती तकनीकों के प्रति जागरूकता विकसित करना था*। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को AI के मानव जीवन एवं समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया।
*प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े विभिन्न अवसरों एवं चुनौतियों पर प्रभावशाली ढंग से अपने तर्क प्रस्तुत किए। AI के पक्ष में बोलने वाले विद्यार्थियों ने शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक* *अनुसंधान, औद्योगिक विकास एवं संचार के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि AI उत्पादकता बढ़ाने, जटिल कार्यों को सरल बनाने, बेहतर निर्णय लेने तथा तकनीकी नवाचार को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।*
*वहीं, AI के विपक्ष में बोलने वाले विद्यार्थियों ने रोजगार के अवसरों पर संभावित प्रभाव, डेटा गोपनीयता, साइबर अपराध, भ्रामक सूचनाओं के प्रसार, नैतिक चुनौतियों तथा तकनीक पर बढ़ती निर्भरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अत्यधिक निर्भरता से मनुष्य की स्वतंत्र चिंतन एवं निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है*। चर्चा के दौरान AI के जिम्मेदाराना उपयोग, मानवीय निगरानी तथा नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर *स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. महेंद्र सिंह पाल ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य एवं अनुसंधान सहित प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है*। विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है कि वे नई तकनीकों को समझें और उनका सकारात्मक एवं जिम्मेदाराना उपयोग करना सीखें। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में तार्किक सोच, आत्मविश्वास, संवाद कौशल एवं समसामयिक विषयों की समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
*विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) त्रिप्ति जुयाल सेमवाल ने अपने संदेश में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक प्रभावशाली तकनीकी शक्ति है जो मानव जीवन को अधिक सरल, सुगम एवं उन्नत बनाने की क्षमता रखती है*। हालांकि तकनीकी विकास के साथ मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक के प्रति जागरूक, नवाचारी एवं जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया।
*विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने कहा कि आज का युग तकनीकी परिवर्तन का युग है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की शिक्षा, अनुसंधान एवं रोजगार के स्वरूप को प्रभावित कर रही है। विद्यार्थियों को केवल तकनीक का उपयोग करने तक सीमित न रहकर उसके प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण भी करना चाहिए*। उन्होंने कहा कि वाद-विवाद जैसी शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, आत्मविश्वास, नेतृत्व कौशल एवं स्वतंत्र विचार विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं।
*प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में डॉ. आर. बी. सिंह, डीन एकेडमिक्स (अध्यक्ष), डॉ. ए. के. दीक्षित, डीन, स्कूल ऑफ लॉ तथा डॉ. अंजू थापलियाल, डीन, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (सदस्य) शामिल रहे*। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के तर्क, प्रस्तुतीकरण, विषय की समझ एवं संवाद कौशल के आधार पर विजेताओं का चयन किया।
*प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सुश्री अवंतिका रावत (तृतीय वर्ष, कृषि संकाय), द्वितीय स्थान सुश्री दीक्षा (द्वितीय वर्ष, विधि संकाय) तथा तृतीय स्थान सुश्री खुशी भारती (तृतीय वर्ष, कृषि संकाय) ने प्राप्त किया*। सभी विजेताओं को ट्रॉफी एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. विनय, डॉ. प्रज्ज्वल, डॉ. शिवानी, डॉ. शुभम, डॉ. साहिल, सुश्री शिवानी एवं सुश्री अंबिका द्वारा किया गया।
इस अवसर पर वाइस प्रेसिडेंट प्रो डॉ तृप्ति जुयाल सेमवाल, वाइस चांसलर प्रो डॉ आशीष सेमवाल, रजिस्ट्रार श्रीमती अंबिका जुयाल, डीन एकेडमिक्स प्रो डॉ आर बी सिंह, प्रिंसिपल बीएड डॉ सीता जुयाल, डीन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी डॉ महेंद्र सिंह पाल, डीन स्कूल ऑफ़ लाॅ डॉ अनिल कुमार दीक्षित, डीन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट डॉ अंजू गैरोला थपलियाल सहित सभी स्कूल के प्रिंसिपल डीन एवं शिक्षक उपस्थित थे।

