सेमिनार में खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और नवाचार के माध्यम से भुखमरी मुक्त भारत के निर्माण पर दिया गया जोर
*माया देवी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (SoAT) द्वारा विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर “इनोवेट टुडे, नरिश टुमॉरो” (आज नवाचार करें, कल का पोषण करें) थीम पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया।* कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को खाद्य सुरक्षा, पोषण सतत कृषि और वैश्विक स्तर पर भुखमरी की चुनौती के प्रति जागरूक करना तथा इन समस्याओं के समाधान में वैज्ञानिक नवाचार की भूमिका से परिचित कराना था, सेमिनार में कृषि एवं खाद्य प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट प्रो डॉ तृप्ति जुयाल सेमवाल, वाइस चांसलर प्रो डॉ आशीष सेमवाल , डीन स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी प्रो महेंद्र सिंह पाल द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस सेमिनार में विश्व खाद्य दिवस के महत्व इतिहास और उद्देश्यों पर विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विचारों एवं भाषणों से हुई। विद्यार्थियों ने खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की भूमिका तथा प्रत्येक व्यक्ति तक सुरक्षित, पर्याप्त और पौष्टिक भोजन पहुँचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस दौरान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सतत कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकने के महत्व पर भी चर्चा की गई।
सेमिनार के दौरान खाद्य सुरक्षा के विभिन्न आयामों खाद्य उपलब्धता भोजन तक पहुंच पोषण संबंधी उपयोग और स्थिरता पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, जल संकट, फसल कटाई के बाद खाद्यान्न की बर्बादी और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों जैसी चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। साथ ही, इन समस्याओं के समाधान के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि, आधुनिक भंडारण तकनीकों, प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला, पोषण जागरूकता और कृषि क्षेत्र में नवाचार को आवश्यक बताया।
*स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो डॉ*
*एम. एस. पाल ने अपने संबोधन में सर्वप्रथम इस सेमिनार में आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया उन्होंने विद्यार्थियों को भारत में खाद्य सुरक्षा की स्थिति, हरित क्रांति के योगदान, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और देश में खाद्य उत्पादन एवं वितरण से जुड़ी चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी कि खाद्य सुरक्षा केवल पर्याप्त खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है* बल्कि प्रत्येक व्यक्ति तक सुरक्षित, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और युवाओं की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में नए विचारों और नवाचारों के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
*अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की उपाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) त्रिप्ति जूयाल सेमवाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और पोषण एक स्वस्थ सशक्त एवं विकसित समाज की आधारशिला हैं*। आज के समय में कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बदलती खाद्य आवश्यकताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में युवाओं को वैज्ञानिक सोच, नवाचार और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी के साथ आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों को सामाजिक समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं।
*विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल कृषि क्षेत्र की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग का साझा दायित्व है। आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, सतत कृषि पद्धतियों और प्रभावी संसाधन प्रबंधन के माध्यम से खाद्य* उत्पादन एवं वितरण प्रणाली को अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। *उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार-आधारित दृष्टिकोण अपनाने तथा अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र के सतत विकास में करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाने में सहायक हैं।*
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने खाद्य एवं कृषि से जुड़े मुद्दों के प्रति उनकी जागरूकता और रुचि को प्रदर्शित किया। भाषणों, परिचर्चाओं और विशेषज्ञ संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को खाद्य प्रणालियों की वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। इस आयोजन ने उनके संवाद कौशल आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर वाइस प्रेसिडेंट प्रो डॉ तृप्ति जुयाल सेमवाल, वाइस चांसलर प्रो डॉ आशीष सेमवाल, रजिस्ट्रार श्रीमती अंबिका जुयाल, डीन एकेडमिक्स प्रो डॉ आर बी सिंह, प्रिंसिपल बीएड डॉ सीता जुयाल , डीन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी प्रो महेंद्र सिंह पाल सहित सभी शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

