दुष्यंत गौतम का राज्यपाल पद की शपथ लेना देश के संविधान और न्याय व्यवस्था के लिए काला दिन : गरिमा मेहरा दसौनी
शारदीय नवरात्रि की नवमी पर आज देशभर में घर-घर
कन्या पूजन हो रहा है। बेटियों को देवी मानकर उनके चरण पूजे जा रहे हैं, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। यह कैसी विडंबना है कि एक ओर हम कन्या पूजन कर रहे हैं और दूसरी ओर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग के बीच दुष्यंत गौतम का सिक्किम के राज्यपाल पद की शपथ लेकर पदभार ग्रहण करना देश की न्याय व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि अंकिता भंडारी केवल उत्तराखंड की बेटी नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटी थी। उसकी हत्या ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। उसके माता-पिता पिछले चार वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे हैं। ऐसे में अंकिता प्रकरण को लेकर उठ रहे सवालों और कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग के बीच दुष्यंत गौतम को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपा जाना जनभावनाओं को आहत करता है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि आज का दिन देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय की अपेक्षा रखने वाले हर नागरिक के लिए काला दिन है। सवाल किसी व्यक्ति को संवैधानिक पद दिए जाने मात्र का नहीं, बल्कि उस जनविश्वास का है जो न्याय व्यवस्था से जुड़ा होता है। जब एक बेटी के माता-पिता आज भी न्याय की गुहार लगा रहे हों, तब सरकार का दायित्व है कि वह उनकी पीड़ा सुने और उनके मन में उठ रहे सवालों का पारदर्शी जवाब दे।
उन्होंने कहा कि भाजपा को बताना चाहिए कि अंकिता भंडारी के परिवार को अब तक पूर्ण न्याय का भरोसा क्यों नहीं मिल पाया है? अंकिता प्रकरण से जुड़े तमाम सवालों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने और हर संदेह का निष्पक्ष जांच के माध्यम से समाधान करने की जिम्मेदारी सरकार की है। किसी भी संवेदनशील मामले में न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
दसौनी ने कहा कि नवरात्रि में कन्या पूजन तभी सार्थक होगा, जब देश की बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। देवी के रूप में कन्याओं के चरण पूजने वाले समाज और सत्ता को अंकिता जैसी बेटियों के लिए भी न्याय की आवाज बुलंद करनी होगी।
गरिमा ने कहा की नारियों को पूजन नहीं सुरक्षा चाहिए।

