विकास की डबल रफ्तार से बदलेगी दूरस्थ गांवों की तस्वीर: हनी पाठक
*सीमांत क्षेत्र में कैबिनेट बैठक से विकास को मिलेगी नई गति: हनी पाठक*
*बुनियादी सुविधाओं से आजीविका तक, गांवों के विकास पर सरकार का फोकस*
देहरादून। सीमांत जिलों में कैबिनेट बैठक को लेकर कांग्रेस के बयान पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती हनी पाठक ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को सीमांत में सरकार की मौजूदगी से परेशानी है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार सीमांत गांवों को विकास, कनेक्टिविटी और आजीविका से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
श्रीमती पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार के ₹4,800 करोड़ के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत उत्तरी सीमा से लगे 662 गांवों को प्राथमिकता से विकसित किया जा रहा है, जिनमें उत्तराखंड के 51 गांव शामिल हैं। कार्यक्रम का फोकस सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, संचार, पर्यटन, कौशल, कृषि-बागवानी और स्थानीय रोजगार पर है, ताकि सीमांत क्षेत्रों से पलायन को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि जुलाई 2026 तक उत्तराखंड में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत 152 परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में 1,836 गतिविधियां भी आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा शिविर, प्रशिक्षण, सेवा वितरण और पर्यटन गतिविधियां शामिल हैं।
श्रीमती पाठक ने कहा कि सीमांत कनेक्टिविटी को भी प्राथमिकता दी गई है। 135 असंबद्ध सीमांत गांवों को जोड़ने के लिए 112 सड़क और 35 लॉन्ग-स्पैन ब्रिज परियोजनाएं, ₹2,513.35 करोड़ की लागत से स्वीकृत की गई हैं। वहीं वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-II के तहत केंद्र ने ₹6,839 करोड़ के प्रावधान से 1,954 गांवों के विकास की योजना बनाई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी सीमांत क्षेत्रों में स्वास्थ्य और आजीविका को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ के तहत पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के 108 सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की पहल की गई है।
श्रीमती हनी पाठक ने कांग्रेस से सवाल किया कि सरकार देहरादून में बैठकर सीमांत की बात करे तो आपत्ति, सीमांत में जाकर कैबिनेट बैठक करे तो भी आपत्ति आखिर कांग्रेस चाहती क्या है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को फोटो-ऑप दिखाई देता है, लेकिन उसे सीमांत गांवों में पहुंच रही सड़क, स्वास्थ्य, संचार और आजीविका की सुविधाएं क्यों नहीं दिखाई देतीं?
उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र कोई राजनीतिक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्तराखंड की सामाजिक-आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार हैं। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार सीमांत को प्रदेश के आखिरी छोर के बजाय विकास की पहली पंक्ति में रखने की दिशा में काम कर रही है। कांग्रेस बेबुनियाद बातें करने के बजाय पहले अपने शासनकाल में सीमांत क्षेत्र में हुए कार्य का हिसाब जनता के सामने रखे।
- श्रीमती हनी पाठक
प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड
