
उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत में रिसर्च, नवाचार, उद्यमिता और सामुदायिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
यूपीईएस और नेक्टर ने सतत विकास के लिए टेक्नोलॉजी-लेड समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया
रणनीतिक साझेदारी उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत में इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च, टेक्नोलॉजी डिप्लॉयमेंट
एंटरप्रेन्योरशिप और कम्युनिटी-फोकस्ड इनोवेशन को बढ़ावा देगी
देहरादून, 16 सितंबर। यूपीईएस और नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन एंड रीच (नेक्टर) ने अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, उद्यमिता, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

एमओयू पर यूपीईएस के प्रो वाइस चांसलर (ऑपरेशंस एंड ग्रोथ इनिशिएटिव्स) एवं रजिस्ट्रार मनीष मादान तथा नेक्टर के महानिदेशक डॉ. अरुण कुमार सरमा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर यूपीईएस के कुलपति डॉ. सुनील राय, प्रो वाइस चांसलर डॉ. वीणा दत्ता, नेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों तथा विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।
इस सहयोग के तहत दोनों संस्थान वास्तविक समस्याओं की पहचान कर तकनीक-संचालित समाधानों का विकास, परीक्षण और विभिन्न समुदायों एवं संस्थानों में उनका क्रियान्वयन करेंगे। साझेदारी का विशेष फोकस आपदा प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाएं, आजीविका संवर्धन और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों पर रहेगा।
यह साझेदारी यूपीईएस की मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च क्षमताओं को नेक्टर के उस अनुभव के साथ जोड़ेगी, जिसके तहत वह क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए उपयुक्त टेक्नोलॉजीज़ के उपयोग को सक्षम बनाता है। इसका फोकस वास्तविक समस्याओं की पहचान करने, टेक्नोलॉजी.एनेबल्ड समाधानों को विकसित और वैलिडेट करने और उन्हें कम्युनिटीज़ और संस्थानों में लागू करने की संभावनाओं को तलाशने पर होगा।
इस एमओयू पर श्री मनीष मादान, प्रो वाइस चांसलर – ऑपरेशंस एंड ग्रोथ इनिशिएटिव्स और रजिस्ट्रार, यूपीईएस, और डॉ. अरुण कुमार सरमा, डायरेक्टर जनरल, नेक्टर ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर यूपीईएस, डॉ वीणा दत्ता, प्रो वाइस चांसलर – अकादमिक ऑपरेशंस और डीन स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग, डॉ. सोमनाथ नेक्टर के साथ वरिष्ठ लीडर्स और फैकल्टी मेंबर्स उपस्थित रहे।
यह सहयोग विशेष रूप से उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण है जहां भौगोलिक स्थिति, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और विकास से जुड़ी जरूरतें डिज़ास्टर रेज़िलिएंस, क्लीन एनर्जी, हेल्थकेयर, आजीविका और एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी.लेड हस्तक्षेपों के अवसर पैदा करती हैं।
इस सहयोग पर बोलते हुए, डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर यूपीईएस ने कहा यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे यह सुनिश्चित करें कि रिसर्च और इनोवेशन समाज के लिए सार्थक समाधानों में बदलें। नेक्टर के साथ हमारा सहयोग यूपीईएस की इंटरडिसिप्लिनरी विशेषज्ञता को जमीन पर मौजूद विकास प्राथमिकताओं से जोड़ने का अवसर पैदा करता है। हम अपने छात्रों, फैकल्टी मेंबर्स और शोधकर्ताओं को ऐसे समाधानों पर काम करने में सक्षम बनाने के लिए उत्सुक हैं, जो प्रासंगिक, स्केलेबल और सस्टेनेबल हों।
डॉ. अरुण कुमार सरमा, डायरेक्टर जनरल नेक्टर ने कहा, ” नेक्टर क्षेत्रीय जरूरतों के जवाब में उपयुक्त टेक्नोलॉजीज़ के उपयोग को सक्षम बनाने के लिए काम करता है। यूपीईएस के साथ हमारा जुड़ाव अकादमिक विशेषज्ञता, इनोवेशन क्षमताओं और फील्ड.लेवल समझ को साथ ला सकता है, ताकि कम्युनिटीज़, संस्थानों और एंटरप्राइज़ेज़ के लिए समाधान विकसित किए जा सकें, विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत और उन अन्य क्षेत्रों मेंए जो समान विकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।”
यह साझेदारी कोलैबोरेटिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट, टेक्नोलॉजी वैलिडेशन और फील्ड डिप्लॉयमेंट, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप, प्रोफेशनल ट्रेनिंग, कैपेसिटी बिल्डिंग, नॉलेज एक्सचेंज, और स्टूडेंट व फैकल्टी एंगेजमेंट में सहयोग को आगे बढ़ाएगी। गतिविधियों में जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट्स, पायलट स्टडीज़, टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन्स, वर्कशॉप्स, इंटर्नशिप्स, इनोवेशन चैलेंजेज़ और स्टार्टअप मेंटरिंग शामिल हो सकते हैं।
इस संवाद के दौरान, यूपीईएस के स्कूलों ने सहयोग के संभावित क्षेत्रों को रेखांकित किया। स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग ने ड्रोन टेक्नोलॉजीज़, डिज़ास्टर प्रिपेयर्डनेस, रिस्क रिडक्शन और एनर्जी में अवसर प्रस्तुत किएय स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी आईओटी.आधारित समाधानों को रेखांकित किया, जबकि स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी ने अर्ली कैंसर डिटेक्शन और अन्य हेल्थकेयर एप्लिकेशन्स सहित रिसर्च रुचियों को प्रस्तुत किया।
हस्ताक्षर के बादए यूपीईएस और नेक्टर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करेंगे और ऐसे विशिष्ट सहयोगी प्रोजेक्ट्स और इम्प्लीमेंटेशन मेकैनिज़्म विकसित करेंगे, जिनका उद्देश्य रिसर्च और उभरती टेक्नोलॉजीज़ को सतत और समावेशी विकास के लिए व्यावहारिक समाधानों में बदलना होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें : www.upes.ac.in
यूपीईएस के बारे में:
उत्तराखंड राज्य विधानमंडल के यूपीईएस अधिनियम, 2003 के तहत स्थापित, यूपीईएस एक टॉप.रैंक्ड, यूजीसी.मान्यता प्राप्त निजी यूनिवर्सिटी है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी एनआईआरएफ 2025 के अनुसार, यूपीईएस को यूनिवर्सिटीज़ में 45वां स्थान मिला है। इसके साथ ही लॉ में 18वां, मैनेजमेंट में 36वां और इंजीनियरिंग में 43वां स्थान मिला है। टाइम्स हायर एजुकेशन यानी टीएचई वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार, यूपीईएस अब वैश्विक स्तर पर 501.600 बैंड में और भारत में 5वें स्थान पर है, जो 2025 में 7वें स्थान से बेहतर है। विशेष रूप से रिसर्च क्वालिटी में यूपीईएस ने केवल एक वर्ष में 57 स्थानों की छलांग लगाई और वैश्विक स्तर पर 299वां स्थान हासिल किया। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 द्वारा भारत में अकादमिक रेप्युटेशन के आधार पर नंबर 1 निजी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है। यह दुनिया की टॉप 2ः यूनिवर्सिटीज़ में शामिल है।
यूपीईएस को विश्व स्तर पर प्रशंसित क्यूएस रेटिंग द्वारा एम्प्लॉयबिलिटी यानी प्लेसमेंट्स में 5 स्टार मिले हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसार, यूपीईएस के 50़ फैकल्टी मेंबर्स दुनिया के टॉप 2ः रिसर्चर्स में शामिल हैं।
यूपीईएस अपने सात स्कूलों के माध्यम से ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम्स प्रदान करता है स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन, स्कूल ऑफ लॉए स्कूल ऑफ बिजनेस, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी और स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज़ एंड ह्यूमैनिटीज़। यूपीईएस परिवार में 20,000़+ छात्र, 1,500़+ फैकल्टी और स्टाफ मेंबर्स और 40,000़+ एलुमनाई की एक मजबूत कम्युनिटी शामिल हैए जो अलग.अलग सेक्टर्स में ईवाई, केपीएमजी, बेन एंड कंपनी, मैकिन्से एंड कंपनी, कैपजेमिनी, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ऑरेकल, नेस्ले, आईटीसी, अदाणी पावर, ओएनजीसी, जीएमआर, टीसीएस, विप्रो, इन्फोसिस, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, एक्सेंचर, डेलॉइट और अन्य प्रमुख ब्रांड्स में काम करते हैं।
