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नरेंद्रनगर पालिका चुनाव के दौरान हुई घटना पर तेज हुई बहस:  सोशल मीडिया पर मंत्री के समर्थन में बढ़ी प्रतिक्रियाएँ

सुबोध उनियाल के समर्थन में आए पक्ष-विपक्ष के जनप्रतिनिधि, विधायक उमेश कुमार बोले: “कैमरा खोलो, नेता को उकसाओ और टीआरपी पाओ” राजनीति का निम्न स्तर

 

नरेंद्रनगर पालिका चुनाव के दौरान प्रदेश के निर्वाचन मंत्री सुबोध उनियाल और एक महिला के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब इस मामले में जनता के साथ-साथ विभिन्न जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने लगी हैं। दिलचस्प बात यह है कि मंत्री के समर्थन में सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष से जुड़े कई लोग भी खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।

खानपुर विधायक उमेश कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजकल राजनीति में एक नया चलन शुरू हो गया है, जिसमें “कैमरा खोलो, बड़े नेताओं को उकसाओ और टीआरपी पाओ” की मानसिकता हावी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी लोकप्रिय नेता को जानबूझकर उकसाकर उसकी प्रतिक्रिया को पूरे घटनाक्रम का केंद्र बना देना लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा बनता जा रहा है।

उमेश कुमार ने कहा कि यदि किसी मंत्री, विधायक या जनप्रतिनिधि से कोई गलती हुई है तो उसके लिए कानून, चुनाव आयोग और न्यायिक व्यवस्था मौजूद है। निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोष साबित होने पर कार्रवाई भी होनी चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति को योजनाबद्ध तरीके से उकसाकर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास उचित नहीं कहा जा सकता।

सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग सुबोध उनियाल के पक्ष में अपनी बात रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि राजनीति में विरोध का भी एक दायरा होता है और व्यक्तिगत सम्मान की मर्यादा सभी पक्षों को बनाए रखनी चाहिए।

समर्थकों का कहना है कि सुबोध उनियाल उत्तराखंड की राजनीति के उन गिने-चुने नेताओं में हैं जो आज भी आम जनता के लिए सहज रूप से उपलब्ध रहते हैं। सचिवालय, विधानसभा, कार्यालय या निजी आवास, हर जगह लोग अपनी समस्याएँ लेकर उनसे मिलते रहे हैं। उत्तरकाशी से लेकर चकराता, टिहरी से लेकर हरिद्वार तक बड़ी संख्या में ऐसे लोग मिल जाएंगे जो उनके जनसंपर्क और कार्यशैली के उदाहरण देते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन किसी एक वीडियो क्लिप या एक क्षण की प्रतिक्रिया के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पूरे सार्वजनिक जीवन और कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

इस बीच घटना को लेकर एक नया सवाल भी उठाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित महिला नरेंद्रनगर क्षेत्र की मतदाता नहीं थीं, तो वह मतदान केंद्र के भीतर किस प्रकार पहुँचीं। लोगों ने निर्वाचन अधिकारियों से इस पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है ताकि सभी तथ्यों पर स्थिति साफ हो सके।

राजनीतिक हलकों में फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों का कहना है कि “मंत्री बनना आसान हो सकता है, लेकिन दशकों तक जनता के बीच रहकर उनकी उम्मीदों का बोझ उठाना आसान नहीं होता, और यही कारण है कि हर कोई सुबोध उनियाल नहीं बन सकता।”

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