चमोली ।देवभूमि उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चारण, धार्मिक अनुष्ठानों एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही सम्पूर्ण क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय बाबा रुद्रनाथ” के दिव्य जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। वातावरण में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत, तीर्थयात्री एवं स्थानीय श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। हिमालय की गोद में स्थित बाबा रुद्रनाथ धाम को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे सम्पूर्ण धाम अलौकिक आभा से आलोकित दिखाई दिया। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चारण एवं पूजा-अर्चना के पश्चात कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में विशेष महत्व रखने वाले श्री रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के ‘एकानन स्वरूप’ अर्थात मुख रूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिव्य धाम में भगवान शिव स्वयं अपने रुद्र रूप में विराजमान हैं। बर्फ से आच्छादित हिमालयी चोटियों एवं प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित यह धाम श्रद्धालुओं को अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
कपाट खुलने के साथ ही आगामी छह माह तक बाबा रुद्रनाथ की नियमित पूजा-अर्चना, विशेष अनुष्ठान एवं धार्मिक आयोजन संपन्न किए जाएंगे। देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालु इस दिव्य धाम में पहुंचकर भगवान शिव के दुर्लभ दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
रुद्रनाथ यात्रा अपनी कठिन किन्तु रोमांचकारी पदयात्रा के लिए भी प्रसिद्ध है। दुर्गम पर्वतीय मार्गों से 
होकर गुजरने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं को अध्यात्म, प्रकृति और आस्था के दिव्य संगम का अनुभव कराती है। कपाटोद्घाटन के साथ ही इस वर्ष की पवित्र रुद्रनाथ यात्रा का भी शुभारंभ हो गया है।
वहीं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं यात्रा को सुगम बनाने के लिए चमोली पुलिस द्वारा यात्रा मार्गों एवं प्रमुख पड़ावों पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। प्रशासन एवं पुलिस की ओर से यात्रियों से सावधानी एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई है।
