उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप ने आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन केवल एक भौगोलिक राज्य की मांग नहीं था, बल्कि यह पहाड़ की अस्मिता, युवाओं के भविष्य, महिलाओं के संघर्ष और जनभावनाओं का आंदोलन था। इस आंदोलन में अनेक आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, हजारों लोगों ने जेल यात्राएं कीं और वर्षों तक संघर्ष कर अलग उत्तराखंड राज्य का सपना साकार किया।
धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि राज्य निर्माण की मूलभावना की अनदेखी की जा रही है राज्य निर्माण लंबे संघर्षो शहादतों से मिला लेकिन सत्ता में बैठे लोग राज्य निर्माण की मूल भावना स्वास्थ्य शिक्षा एवं रोजगार की अनदेखी कर रही है शराब माफिया खनन माफियाओ को सरकार का संरक्षण है । राज्य निर्माण में मातृ शक्ति ने बढ़ चढ़ कर भागीदारी निभाई और शहादतें भी दी लेकिन महिला अपराधों में लगातर वृद्धि हो रही है जिससे भय का माहौल है ।जिससे प्रदेश की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण आन्दोलन के समय जितने भी मुकदमें चल रहे हैं उनके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि यह अत्यंत दुख और चिंता का विषय है कि जिन आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान से उत्तराखंड अस्तित्व में आया, वही आंदोलनकारी लगातार उपेक्षा और अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी अनेक आंदोलनकारियों को सम्मान, पहचान एवं मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर आंदोलनकारियों के हित में घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन धरातल पर उनका समुचित क्रियान्वयन दिखाई नहीं देता। कई पात्र आंदोलनकारी आज भी चिन्हीकरण की प्रक्रिया में भटक रहे हैं, जबकि अनेक परिवार आर्थिक एवं सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। यह अत्यंत आवश्यक है कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान एवं अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए लंबित चिन्हीकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करे, आंदोलनकारियों एवं आश्रितों को सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध कराए, युवाओं को राज्य आंदोलन के इतिहास से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए तथा राज्य निर्माण आंदोलन की भावना के अनुरूप जनहितकारी नीतियां लागू करे।
प्रदेश प्रवक्ता डॉ0 प्रतिमा सिंह ने चम्पावत प्रकरण पर कहा कि चम्पावत सामूहिक बलात्कार मामले में पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि पुलिस सरकार के दबाव मे काम कर रही है तथा देवभूमि की शाख को शर्मसार कर रही है। उन्होंने कहा कि 16 साल की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना होती है, एफआईआर फाइल होती है जिसमें वह स्वयं के साथ हुई घटना की आपबीती बताती है, उसके उपरांत उसका मेडिकल होता है। पॉक्सो एक्ट मे प्रावधान है कि मेडिकल रिपोर्ट में क्या आया यह सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है साथ मजिस्ट्रेट के सामने हुए बयान गोपनीय होते हैं जिसका उपयोग केवल ट्रायल के समय किया जा सकता है। पुलिस द्वारा पीडिता के बयान को सार्वजनिक करना पूरी तरह से कानून का उल्लंघन है यह बात पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह प्रकट करता है कि पुलिस सत्ता पक्ष के दबाव मे काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के अपराधी आज बेखौफ हैं कि उन्हें सत्ता बचा लेगी।
धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि उत्तराखंड की जनता कभी भी आंदोलनकारियों के योगदान को भुला नहीं सकती। सरकार को भी चाहिए कि वह आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी समस्याओं के समाधान हेतु गंभीरता से कार्य करे।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री अजय सिंह, प्रदेश प्रवक्ता डॉ0 प्रतिमा सिंह, महेश जोशी, हरेन्द्र सिंह बाबा, देवेन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे।
डॉ0 प्रतिमा सिंह
प्रदेश प्रवक्ता
