देहरादून -उत्तराखंड विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में कांग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के ज्ञान पर सवाल खड़े कर दिए। इसके जवाब में गणेश गोदियाल ने सीएम धामी को सीधा चैलेंज देते हुए कहा, “जहाँ चाहें वह मेरे ज्ञान की परीक्षा ले लें, साथ ही उनके ज्ञान की भी जांच हो जाएगी। अगर सब कुछ दिल्ली से होना है तो विशेष सत्र क्यों बुलाया? जनता के टैक्स का पैसा क्यों बर्बाद किया?”
विशेष सत्र ‘नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार’ शीर्षक से बुलाया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री धामी ने विपक्षी दलों (कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके) पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सदन में कहा कि कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल महिला आरक्षण बिल को लेकर भ्रम फैला रहे हैं।
गोदियाल ने इस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी सदन में मेरे ज्ञान पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि… मैं विनम्रता से कहना चाहता हूँ कि मुद्दों से ध्यान न भटकाएँ। यदि आपको मेरे ज्ञान पर संदेह है, तो एक दिन खुले मंच और मीडिया के सामने संवाद कर लेते हैं। आप मेरा इंटरव्यू लें, मैं आपका ले लूँ।” गोदियाल ने आगे कहा कि यदि केंद्र सरकार से ही सब कुछ तय होता है तो राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद करने का क्या मतलब है?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तत्काल लागू किया जाए ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी अपनी सीट भी महिला आरक्षित हो जाती है तो वह खुद या परिवार की किसी महिला को चुनाव नहीं लड़ाएंगे।
पृष्ठभूमि
2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। हालांकि, परिसीमन और जनगणना के बाद लागू होने वाला यह कानून अभी तक कई राज्यों में लागू नहीं हो पाया है। उत्तराखंड कांग्रेस लगातार राज्य स्तर पर तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग कर रही है, जबकि भाजपा इसे केंद्र की उपलब्धि बताते हुए विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सियासी जंग अब और तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देख रहे हैं।
