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 Competition: लाॅ काॅलेज देहरादून में राष्ट्रीय विधिक सहायता योजना ड्राफ्टिंग प्रतियोगिता का आयोजन

वि-सहा-यो प्रतियोगिता एक व्यावहारिक उन्मुख दृष्टिकोणः सीमा डुंगराकोटी

देहरादून 29 अप्रैल। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज देहरादून में आज (वि-सहा-यो) राष्ट्रीय विधिक सहायता योजना ड्राफ्टिंग कम्पीटिशन का आयोजन किया गया। देहरादून जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती सीमा डंुगराकोटी इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एवं प्रतियोगिता के अंतिम मुकाबलें की जज थी। मुकाबलें के दूसरे जज लाॅ काॅलेज के डीन प्रो0 राजेश बहुगुणा थे। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता में देश के 23 विश्वविद्यालयों की टीमों ने भागीदारी की। प्रतियोगिता का पहला राउन्ड आनलाईन माध्यम से हुआ जबकि अंतिम मुकाबला हाइब्रिड मोड में था। इस अवसर पर विधिक प्रगति नामक वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन किया गया।


प्रतिभागियों द्वारा वांछित लाभार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर अपनी-अपनी योजनाएं प्रस्तुत की गई। मुख्यकर वरिष्ठ नागरिक, एच0आई0वी पीड़ित, कस्टोडियल डेथ सहित अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए अपनी प्रस्तावित योजनाओं को प्रदर्शित किया।
अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती सीमा डंुगराकोटी ने समाज के सभी वर्गों खासकर पिछड़ें और हाशिए पर पड़े लोगों तक न्याय पहुँचाने में कानूनी मदद की सबसे ज़्यादा अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रतियोगिता में प्रतिभाग लेने वालों के नए और प्रैक्टिकल तरीकों की दिल से तारीफ की और असल दुनिया की कानूनी चुनौतियों से निपटने में उनके प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने लाॅ काॅलेज देहरादून द्वारा आयोजित वि-सहा-यो प्रतियोगिता को एक व्यावहारिक उन्मुख दृष्टिकोण बताया और काॅलेज का एक अनुकरणीय प्रयास बताया।
अपने सम्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 धर्मबुद्धि ने कानूनी पढ़ाई में ड्राफ्टिंग स्किल्स की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने छात्रों को रोज़ाना ड्राफ्टिंग की आदत डालने के लिए बढ़ावा दिया और इस बात पर ज़ोर दिया कि लगातार अभ्यास करने से न सिर्फ़ काूननी समझ और एनालिटिकल सोच बेहतर होती है बल्कि काूननी पेशे में प्रोफेशनल काबिलियत और पैसे का फायदा भी बढ़ता है।
कड़े मुकाबलें के बाद निर्णायक मण्डल द्वारा स्कूल आॅफ लाॅ, नारसी मोंजी, बेंगलुरू को प्रथम, यूनिवर्सिटी आॅफ दिल्ली को द्वितीय व हिमाचल प्रदेश नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी शिमला को तृतीय विजेता घोषित किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से विश्वविद्यालय के डा0 राधेश्याम झा, वत्सल चैधरी, एडवोकेट नीतिश बुडोला, डा0 रमाकांत त्रिपाठी, डा0 भावना अरोड़ा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

 

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