जनगणना 2027 पर प्राध्यापकों की ड्यूटी आवंटन पर कांग्रेस का तीखा विरोध
देहरादून। महानगर कांग्रेस कमेटी देहरादून के अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने जनगणना 2027 के लिए देहरादून जनपद के महाविद्यालयों के प्राध्यापकों, खासकर महिला प्राध्यापकों को एन्यूमरेटर की ड्यूटी देने के निर्णय पर गहरी आपत्ति जताई है।
डॉ. गोगी ने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में सभी का योगदान जरूरी है, लेकिन ड्यूटी आवंटन का तरीका पूरी तरह अनुचित, असंतुलित और लैंगिक भेदभावपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर नाराजगी जताई कि ज्यादातर महिला प्राध्यापकों को ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पुरुष प्राध्यापकों को इससे लगभग मुक्त रखा गया है।
“नारी शक्ति वंदन का विरोधाभास”
डॉ. गोगी ने कहा, “एक तरफ सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण और ‘नारी शक्ति वंदन’ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं महिला प्राध्यापकों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। यह स्पष्ट नीतिगत विफलता और लैंगिक समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।”
शैक्षणिक कार्यों पर पड़ेगा बुरा असर
डॉ. गोगी ने बताया कि प्राध्यापक पहले से ही शिक्षण, अनुसंधान, प्रायोगिक परीक्षाएं, मौखिक परीक्षाएं, उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन और शैक्षणिक भ्रमण जैसे अत्यधिक जिम्मेदारी वाले कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में अतिरिक्त जनगणना ड्यूटी थोपना अव्यवहारिक है।
उन्होंने चेतावनी दी कि विश्वविद्यालय परीक्षाएं 5 मई 2026 से शुरू हो रही हैं। डीएवी (पीजी) कॉलेज जैसे बड़े महाविद्यालयों में हजारों छात्रों की परीक्षाएं तीन शिफ्टों में चल रही हैं। बड़ी संख्या में महिला प्राध्यापकों को बाहरी ड्यूटी पर भेजने से परीक्षा संचालन प्रभावित होगा और विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
प्राध्यापकों में व्याप्त असंतोष
डॉ. गोगी ने कहा कि इस निर्णय से प्राध्यापक वर्ग में काफी रोष है। यदि तुरंत पुनर्विचार नहीं किया गया तो शैक्षणिक व्यवस्था पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मांगें
डॉ. गोगी ने प्रशासन से तत्काल मांग की कि:
• ड्यूटी आवंटन में लैंगिक संतुलन और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
• प्राध्यापकों के पद, गरिमा और शैक्षणिक दायित्वों को ध्यान में रखा जाए।
• विश्वविद्यालय परीक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए इस निर्णय की समीक्षा की जाए।
डॉ. गोगी ने कहा कि प्रशासन को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि न तो शैक्षणिक कार्य बाधित हों और न ही महिला प्राध्यापकों पर अनुचित बोझ पड़े।
