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दुखद हदसा: हरिद्वार में बोरवेल हादसा, 55 वर्षीय मजदूर की 11 घंटे चले रेस्क्यू के बाद मौत

हरिद्वार । श्यामपुर थाना क्षेत्र के कांगड़ी गांव में शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे बोरवेल खुदाई के दौरान एक मजदूर मिट्टी की ढांग गिरने से 30-40 फीट गहरे गड्ढे में फंस गया। लगभग 11 घंटे तक चले युद्ध स्तर के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस की टीम ने शव को बाहर निकाला। अस्पताल में ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना का विवरण
गांव की गली नंबर-6 निवासी प्रमोद सिंह के प्लॉट पर पेयजल के लिए मैनुअल बोरिंग का काम चल रहा था। 55 वर्षीय ठेकेदार मनोहर सिंह (कांगड़ी निवासी) गड्ढे में नोज लगाने उतरे थे, तभी अचानक मिट्टी की दीवार ढह गई और वह मिट्टी के नीचे दब गए। घरों से निकलने वाले पानी की वजह से मिट्टी में नमी अधिक होने के कारण बार-बार ढांग गिरती रही, जिससे रेस्क्यू कार्य में भारी दिक्कत आई।
रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। शुरू में जेसीबी से खुदाई की कोशिश की गई, लेकिन गहराई और मिट्टी की स्थिति को देखते हुए पोकलैंड (पोक्लेन) मशीन मंगाई गई। मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने रेस्क्यू में देरी का आरोप लगाते हुए नजीबाबाद-हरिद्वार हाईवे जाम करने का प्रयास भी किया, जिसे एसडीएम जितेंद्र कुमार, एसपी सिटी अभय कुमार सिंह और अन्य अधिकारियों ने समझा-बुझाकर शांत किया।
पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद भी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू में तेजी लाने के निर्देश दिए। करीब 11 घंटे के प्रयास के बाद रात करीब 9 बजे मनोहर का शव निकाला गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
परिवार पर छाया मातम
मनोहर सिंह अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों (13 वर्षीय बेटी व 5 वर्षीय बेटा) के सहारे परिवार चलाते थे। शव निकलने के बाद परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों ने उन्हें किसी तरह संभाला।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बोरवेल खुदाई के लिए उचित सुरक्षा उपायों और मशीनरी के उपयोग पर जोर दिया।
यह घटना बोरवेल हादसों की पुनरावृत्ति को दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मैनुअल खुदाई के दौरान दीवारों को मजबूत करने, सेफ्टी उपकरणों और मशीनरी के उपयोग को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, ताकि ऐसे दुखद हादसे रोके जा सकें।

 

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