Homeराज्य समाचारलेखक गाँव में गूंजी कविता की अनुगूंज: ‘विरासत कला उत्सव’ का...

लेखक गाँव में गूंजी कविता की अनुगूंज: ‘विरासत कला उत्सव’ का हुआ भव्य आगाज़

 

उत्तराखंड। देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव में शुक्रवार की शाम शब्दों की ऐसी सरगम बिखरी कि पूरा वातावरण साहित्य और संवेदना से महक उठा। दीपों की उजास के बीच शुरू हुए सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” के उद्घाटन समारोह में कविता की ओजस्वी, व्यंग्यात्मक और भावपूर्ण धारा बहती रही। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कभी राष्ट्रभावना को स्वर दिया तो कभी समाज की विडंबनाओं पर तीखा व्यंग्य करते हुए श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध किए रखा। अवसर था उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय एवं लेखक गाँव, थानों, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” का शुभारंभ मुख्य अतिथि ओम प्रकाश जमदग्नि (राज्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार), उपाध्यक्ष पारिस्थितिकी पर्यटन परिषद, उत्तराखंड सरकार, गणेश खुगशाल ‘गणी’, निदेशक लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. सर्वेश उनियाल, कार्यक्रम अधिकारी पर्यटन विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद आयोजित कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और तालियों की गूंज से सभागार बार-बार गूंजता रहा।देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव में शुक्रवार की शाम साहित्य, संस्कृति और काव्य रस से सराबोर हो उठी।


अवसर था उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं लेखक गाँव, थानों, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” के भव्य उद्घाटन का। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी ओज, व्यंग्य और संवेदना से भरी रचनाओं से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ओम प्रकाश जमदग्नि (राज्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार) उपाध्यक्ष, पारिस्थितिकी पर्यटन परिषद, उत्तराखंड सरकार, गणेश खुगशाल ‘गणी’, निदेशक, लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, डॉ. सर्वेश उनियाल, कार्यक्रम अधिकारी, पर्यटन विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और तालियों की गूंज से सभागार बार-बार गूंजता रहा।
दिल्ली से पधारे ओज कवि डॉ. रसिक गुप्ता ने अपनी पंक्तियाँ सुनाईं “पथ प्रदर्शक बनी युगों से, है कलम की धार ही,सार्थक हो जिंदगी बेशक जिएँ दिन चार ही,मोक्ष हम पाएँ न पाएँ, चाहते केवल यही,जन्म भारत में मिले, हम कवि बनें हर बार ही।” इसके बाद उत्तर प्रदेश से आए डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने समसामयिक व्यंग्य से भरी पंक्तियाँ पढ़ीं “चिंगारी जहाँ-जहाँ दीखे ले जाकर आँधी रखते हो,सीने में नफरत रखते हो, होठों पर गाँधी रखते हो।” मध्य प्रदेश से आए राकेश दांगी ने अपनी रचना में कहा“संपूर्ण विश्व के सहायक आए हैं,सृष्टि के प्रथम गायक आए हैं,
सुख-समृद्धि के सुखदायक आए हैं,भारत में फिर ब्रह्मांड के नायक आए हैं।”दिल्ली से आई सरला मिश्रा ने नारी शक्ति पर अपनी भावपूर्ण रचना सुनाते हुए कहा“प्रभु की एक अलौकिक रचना, दो कुलतारी है,सृष्टि का आधार जगत में, होती नारी है।”इसके बाद दिल्ली से आए श्रीकांत श्री ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचना“भले ही दीप से पूजा तू आठों याम मत करना,
मिले कोई मोहल्ले में तो राधेश्याम मत करना…”सुनाकर श्रोताओं से खूब तालियाँ बटोरीं।
उत्तराखंड से आई डॉ. ऋतु सिंह ने देशभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियाँ पढ़ीं—“अपनी आँखों में ख्वाबों की बारात है,सरहदों पर सिपाही जो तैनात है।”वहीं राजेश चेतन ने कहा—
“ये मंदिर नहीं जागरण देश का है,ये मंदिर नहीं व्याकरण देश का है।”कार्यक्रम का संचालन शिवम ढौंडियाल ने किया। इस अवसर पर केंद्र के प्रतिनिधि राजकुमार व अन्य लोग मौजूद रहे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

STAY CONNECTED

123FansLike
234FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest News