CDS जनरल अनिल चौहान ने ‘सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर विद्यार्थियों को किया संबोधित
227 पुस्तकों का दान, विद्यार्थियों से संवाद और महिला सशक्तिकरण पर स्पष्ट संदेश
पौड़ी गढ़वाल: हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने ‘सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं राष्ट्रगीत वंदे मातरम के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सामरिक दृष्टिकोण, बदलते वैश्विक परिदृश्य तथा युवाओं की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
जनरल अनिल चौहान ने सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है, जिसकी आधारशिला शिक्षण संस्थानों में रखी जाती है। उन्होंने भारत की सामरिक परंपरा को वैदिक साहित्य, चाणक्य नीति एवं धनुर्वेद से प्रेरित बताते हुए बदलती युद्ध अवधारणाओं, साइबर एवं तकनीक-प्रधान चुनौतियों तथा आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया। वर्ष 1971 के युद्ध का उल्लेख करते हुए उन्होंने निर्णायक नेतृत्व, रणनीतिक तैयारी और जनसहभागिता को राष्ट्र की शक्ति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत को आंतरिक एवं बाह्य चुनौतियों, परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों और बदलते वैश्विक परिदृश्य के मध्य सुदृढ़ सरकार, सक्षम सेना और सतत रणनीतिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। समापन सत्र में विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने सेना में महिलाओं की भूमिका पर स्पष्ट किया कि चयन का आधार योग्यता और प्रतिबद्धता है।
स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय के लिए यह ऐतिहासिक अवसर है जब देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीरों की भूमि है और यहां की युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा सैन्य प्रशिक्षण, शोध एवं राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। डॉ. रावत ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय को 227 महत्वपूर्ण पुस्तकों के दान हेतु जनरल अनिल चौहान का आभार व्यक्त किया तथा इस पहल को ज्ञान-संपदा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने अनुपमा चौहान के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें उनके पैतृक गांव गवाणा आने का आमंत्रण भी दिया।
देवप्रयाग विधायक विनोद कण्डारी ने अपने संबोधन में कहा कि जनरल अनिल चौहान का विश्वविद्यालय आगमन समूचे गढ़वाल क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी क्षण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सदैव से देश की सुरक्षा में अग्रणी रहा है और यहां की युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति एवं अनुशासन की मजबूत भावना विद्यमान है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को सैन्य, शोध एवं राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे संवाद युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा का संकल्प मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान जनरल अनिल चौहान ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय को सामरिक, ऐतिहासिक एवं शोधपरक विषयों से संबंधित 227 पुस्तकें दान स्वरूप प्रदान कीं। साथ ही प्रो. एम.पी.एस. बिष्ट द्वारा संपादित पुस्तक ‘रंगभूमि दर्शन’ का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर प्रो. महेन्द्र प्रताप सिंह बिष्ट, प्रो. मोहन पंवार, प्रो. मंजुला राणा, प्रो. एचबीएस चौहान, ब्रिगेडियर विनोद नेगी, कर्नल गौरव बत्रा, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. एन.एस. पंवार, प्रो. राजेन्द्र सिंह नेगी, जनसम्पर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
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