हेस्को और नैक नेतृत्व के साथ मिलकर भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क का सह-निर्माण
देहरादून, 18 फरवरी 2026: यूपीईएस ने हेस्को के सहयोग से पर्यावरणीय शिक्षा पर एक राष्ट्रीय स्तर की एक्सपर्ट वर्कशॉप का आयोजन किया। जिसमें अकादमिक लीडर्स, सस्टेनेबिलिटी एक्सपर्ट्स और पॉलिसीमेकर्स एक मंच पर जुटे, ताकि भारतीय हायर एजुकेशन में सस्टेनेबिलिटी को प्रभावी ढंग से समाहित करने के लिए एक मजबूत, व्यावहारिक और लागू करने योग्य “करिकुलम फ्रेमवर्क” तैयार किया जा सके। यह वर्कशॉप पारंपरिक सेमिनार की बजाय एक हाई-इम्पैक्ट, आउटकम-ओरिएंटेड “बिल्ड रूम” के रूप में आयोजित की गई। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय शिक्षा को केवल अवेयरनेस तक सीमित रखने के बजाय एक प्रैक्टिकल, इंटर-डिसिप्लिनरी कॉम्पिटेंसी के रूप में पुनर्परिभाषित करना था। डिलिबरेशन का फोकस टेक्स्टबुक-अवेयरनेस से आगे बढ़कर भारत की इकोलॉजिकल रियलिटीज़ और डेवलपमेंट प्रायोरिटीज़ में निहित, मेज़रबल स्टूडेंट कॉम्पिटेंसीज़ को सक्षम बनाने पर रहा।
इन चर्चाओं के केंद्र में एक राष्ट्रीय इम्पेरेटिव रहा। जैसे-जैसे भारत ग्रोथ, क्लाइमेट रेज़िलिएंस और सस्टेनेबिलिटी ट्रांज़िशन्स की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हायर एजुकेशन को विद्यार्थियों को इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच संतुलन साधने के लिए तैयार करना होगा। प्रतिभागियों ने नेचर-लेड, एक्सपीरिएंशियल और लोकली-एंकरड करिकुलम का समर्थन किया, जो लर्नर्स को एयर, वॉटर, सॉयल, फॉरेस्ट्स और इकोसिस्टम्स से रियल प्रॉब्लम-सॉल्विंग, फील्ड इमर्शन और कम्युनिटी-लिंक्ड लर्निंग के माध्यम से जोड़ता है । जिसे रीजनल एनवायरनमेंटल रियलिटीज़ के अनुरूप ढाला जा सके।
प्रोग्राम की शुरुआत सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र की सबसे विश्वसनीय आवाज़ों में से एक-हेस्को के फाउंडर डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के इनॉग्यूरल एड्रेस से हुई। इसके बाद यूपीईएस के वाइस-चांसलर डॉ. सुनील राय ने वेलकम और इंस्टिट्यूशनल ओवरव्यू प्रस्तुत किया। चीफ गेस्ट डॉ. अनिल डी. सहस्रबुधे चेयरमैन, नैक ने की नोट एड्रेस दिया, जिसमें उन्होंने वर्कशॉप की रिकमेंडेशन्स का नेशनल क्वॉलिटी फ्रेमवर्क्स और करिकुला के ब्रॉडर ट्रांसफॉर्मेशन के साथ अलाइनमेंट रेखांकित किया। वर्कशॉप में एजुकेशन और सस्टेनेबिलिटी लीडरशिप का मजबूत प्रतिनिधित्व रहा, जिनमें डॉ. राजेन्द्र शेंडे, फाउंडर डायरेक्टर, टेरे फाउंडेशनय; डॉ. धरम बुद्धि, वाइस-चांसलर, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी : प्रो. बिनीशा पयट्टाती, एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर, एम.आर.ए.आई और आई.आई.डब्ल्यू.एम; डॉ. संजय जसोला, वाइस-चांसलर, डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी ; प्रो. नवीन कुमार नवानी, डीन-बायो साइंसेज़, आई.आई.टी रुड़की; प्रो. डॉ हिमांशु अरोड़ा, वाइस-चांसलर, सुभारती यूनिवर्सिटी; डॉ. शालिनी भल्ला, मैनेजिंग डायरेक्टर, आई.सी.सी.ई ; श्री कमल आहूजा, प्रिंसिपल, द दून स्कूल; डॉ. मनोज पांडा, डायरेक्टर, डब्ल्यू.आई.टी; प्रो. महावीर रावत, डायरेक्टर, श्री देव सुमन; सुश्री विधूशी निशांक, डायरेक्टर लेखक गाँव और डॉ. सुनीत नैथानी, असिस्टेंट प्रोफेसर, दून यूनिवर्सिटी शामिल रहे।
डिलिबरेशन्स का प्रमुख फोकस पर्यावरणीय शिक्षा को सभी प्रोग्राम्स में एक कोर, एप्लिकेशन-ड्रिवन डिसिप्लिन के रूप में स्थापित करने पर रहा-जहाँ रीजन-स्पेसिफिक लर्निंग पाथवेज़ भारत की इकोलॉजिकल डाइवर्सिटी को रिफ्लेक्ट करें। हिमालयन फ्रैजिलिटी से लेकर अर्बन एयर पॉल्यूशन और वॉटर स्कैरसिटी तक: एक मुख्य थीम इंस्टिट्यूशनलाइज़िंग सोल्यूशन-ओरिएंटेड स्किल्स रही, ताकि स्टूडेंट्स लोकल इश्यूज़ की आइडेंटिफिकेशन कर सकें, कॉन्टेक्स्ट-रिलिवेंट इंटरवेंशन्स डिज़ाइन कर सकें और इम्पैक्ट को मेज़र कर सकें। जिससे सस्टेनेबिलिटी गवर्नेंस, इंडस्ट्री, एंटरप्रेन्योरशिप और कम्युनिटी लीडरशिप में एक एसेंशियल प्रोफेशनल कैपेबिलिटी बन सके।
वर्कशॉप में डॉ. सुनील राय, वाइस-चांसलर, यूपीईएस ने कहा “इंस्टीट्यूशन प्रैक्टिस, रिसर्च और कंट्रीब्यूशन के जरिए सस्टेनेबिलिटी चैलेंजेज़ को सक्रिय रूप से एड्रेस कर रहा है। यह अगले तीन वर्षों में अपनी सोलर एनर्जी प्रोडक्शन को 18ः से बढ़ाकर 30ः करने का लक्ष्य रखता है, साथ ही अवॉइडिंग वेस्ट की कल्चर को प्रोमोट करता है। लगभग 30-35ः रिसर्चर्स एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी पर काम कर रहे हैं, जिनमें प्लास्टिक-टू-फ्यूल कन्वर्ज़न, ई.वी लाइफ एन्हांसमेंट, ग्रीन फ्यूल और ग्रिड ऑप्टिमाइज़ेशन जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। हेस्को के साथ कोलैबोरेशन में और हिल में डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के गाइडेंस के तहत, इंस्टिट्यूशन एनवायरनमेंटल एजुकेशन और क्लाइमेट चेंज के कारण ग्लेशियर मेल्टिंग जैसी अर्जेंट इश्यूज़ पर काम करने के लिए कमिटेड है।”
डॉ. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, चेयरमैन, नैक ने एजुकेशन में बैलेंस्ड, नेचर-अलाइनड अप्रोच की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा ” चैलेंजस जगह-जगह अलग होती हैं, इसलिए सोल्यूशन्स भी लोकल रियलिटीज़ में रूटेड होने चाहिए। जब हम किसी रीजन की कंडीशन्स को समझते हैं, लोकली रिलिवेंट, इनोवेटिव रिस्पॉन्सेज़ डेवलप करते हैं, और उन्हें पॉलिसी में एम्बेड करते हैं, तो इम्पैक्ट कहीं ज्यादा मीनिंगफुल और लास्टिंग होता है।”
वर्कशॉप का समापन इस कंसेंसस के साथ हुआ कि पर्यावरणीय शिक्षा को एक नेशनल कैपेबिलिटी के रूप में विकसित करना आवश्यक है-जो ऐसे सिटिज़न्स और प्रोफेशनल्स को गढ़े, जो डेवलपमेंट के साथ इकोलॉजिकल इंटेग्रिटी का संतुलन बना सकें। अपनी इंस्टिट्यूशनल डायरेक्शन और लीडरशिप को आगे बढ़ाते हुए, यूपीईएस ने कैंपस प्रैक्टिसेज़, रिसर्च प्रायोरिटीज़ और रीजन-लिंक्ड पार्टनरशिप्स के माध्यम से इस इनिशिएटिव को आगे ले जाने की कमिटमेंट दोहराए-जिसमें हेस्को के साथ कंटिन्यूड कोलैबोरेशन भी शामिल है, खासकर हिमालयन कंसर्न्स जैसे क्लाइमेट चेंज के कारण ग्लेशियर मेल्टिंग पर फोकस्ड लेंस के साथ।
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About UPES:
Established through the UPES Act, 2003, of the State Legislature of Uttarakhand, UPES is a top-ranked, UGC-recognised, private university. As per the National Institutional Ranking Framework (NIRF) 2025, the Ministry of Education, Government of India, UPES has been ranked 45 among universities, with a rank of 18 in Law, 36 in Management, and a rank of 43 in Engineering. As per the Times Higher Education (THE) World University Rankings 2026, UPES now stands in the 501-600 band globally and 5th in India, improving from 7th in 2025. Notably, in Research Quality, UPES jumped 57 positions in just one year to be ranked 299 globally. In addition to this, the university has been ranked the No.1 private university in academic reputation in India by the QS World University Rankings 2025. It is among the top 2% of universities in the world.
UPES has also been accredited by NAAC with a grade ‘A’ and has received 5 stars on Employability (placements) by the globally acclaimed QS Rating. The university has had 100% placements over the last five years. 50+ faculty members from UPES feature among the world’s top 2% researchers as per the Stanford University list.
UPES offers graduate and postgraduate programs through its seven schools: School of Advanced Engineering, School of Computer Science, School of Design, School of Law, School of Business, School of Health Sciences & Technology, and School of Liberal Studies and Media. The UPES family includes 19100+ students, 1,500+ faculty and staff members, and a thriving community of 40000+ alumni that work across sectors in marquee brands like EY, KPMG, Bain and Co., McKinsey & Company, Capgemini, Google, Microsoft, Oracle, Nestle, ITC, Adani Power, ONGC, GMR, TCS, Wipro, Infosys, Amazon, Flipkart, Accenture, Deloitte and more.
