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देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में SCI प्रबंधन पर AI आधारित अतिथि व्याख्यान का‌ हुआ आयोजन 

 

डॉ. संजीव कुमार पांडे, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (SRHU) के न्यूरोसर्जरी विभाग में सहायक प्रोफेसर, द्वारा “रीढ़ की हड्डी की चोटों का परिवर्तन: AI, ASIA चार्टिंग और तीव्र नैदानिक दस्तावेजीकरण की भूमिका” विषय पर एक अतिथि व्याख्यान 3 फरवरी 2026 को देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के आयुर्वेद सेमिनार हॉल में आयोजित किया गया।
डॉ. अदिति, डॉ. तृप्ति, डॉ. आलिशा, डॉ. रितु एवं डॉ. मेघा द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम पैरामेडिकल छात्रों के लिए था, जिसमें स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (SCI) के प्रबंधन में हो रही व्यावहारिक प्रगति पर विशेष जोर दिया गया।
व्याख्यान के दौरान डॉ. पांडे ने SCI के न्यूरोलॉजिकल वर्गीकरण के लिए ASIA हानि स्केल (ISNCSCI) को स्वर्ण मानक बताते हुए मोटर एवं संवेदी मूल्यांकन, सामान्य चार्टिंग त्रुटियों तथा रिकवरी ट्रैकिंग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने AI आधारित अनुप्रयोगों जैसे सहायता प्राप्त ASIA स्कोरिंग, भविष्यवाणी विश्लेषण एवं संरचित क्लिनिकल रिकॉर्ड्स हेतु नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) पर भी प्रकाश डाला, जिससे चिकित्सकों का कार्यभार कम होता है और सटीकता बढ़ती है।
डॉ. पांडे ने AI आधारित स्पीच रिकग्निशन को तीव्र नैदानिक दस्तावेजीकरण का प्रभावी माध्यम बताते हुए रोगी देखभाल की दक्षता बढ़ाने में इसकी भूमिका समझाई तथा नैतिकता, गोपनीयता और मानवीय निगरानी के महत्व पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर कार्यक्रम की आयोजक डॉ. तृप्ति ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक व्याख्यान पैरामेडिकल छात्रों को आधुनिक तकनीकों और वैश्विक मानकों से जोड़ते हैं, जिससे वे भविष्य में SCI जैसे जटिल मामलों में अधिक सटीक, वैज्ञानिक और रोगी-केंद्रित उपचार प्रदान कर सकेंगे।
IIC के अंतर्गत देवभूमि मेडिकल कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज द्वारा समन्वित इस व्याख्यान में प्रथम से चतुर्थ वर्ष तक के छात्रों के लिए सिद्धांत और व्यवहार का प्रभावी समन्वय देखने को मिला। विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) एवं प्रोकुलपति (PVC) ने स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़ करने तथा नवीन SCI देखभाल पद्धतियों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में डॉ. पांडे के योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को AI आधारित व्यक्तिगत पुनर्वास, सटीक SCI मूल्यांकन और सुव्यवस्थित कार्यप्रवाह की संभावनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जो ASIA जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रोगी-केंद्रित प्रबंधन की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह व्याख्यान विशेष रूप से फिजियोथेरेपी एवं न्यूरोसर्जरी से जुड़े पेशेवरों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा।

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