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लेखक गांव एवं हिमालय विरासत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में एक विराट बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन

 

गणतंत्र दिवस पर बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन

देहरादून।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर लेखक गांव, देहरादून एवं हिमालय विरासत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में एक विराट बहुभाषी कवि सम्मेलन आ आयोजन डालनवाला स्थित रचना संसार सभागार में आयोजित किया गया।


इस अवसर पर सभी वरिष्ठ एवं प्रसिद्ध कवियों ने राष्ट्रभक्ति, वीर रस और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत कविताओं का सशक्त पाठ किया।
सभी आमंत्रित कवियों का स्वागत करते हुए लेखक गांव के संरक्षक प्रसिद्ध साहित्यकार और भारत के पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि राष्ट्रभक्ति के गीतों का स्वाधीनता आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान रहा है, इन गीतों ने उसे दौर में जन जागरण का कार्य किया और प्रत्येक भारतवासी के मन में राष्ट्रभक्ति की भावना को उद्वेलित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत बाल कवयित्री अंशिका द्वारा बहुत ही भावपूर्ण सरस्वती वंदना से की गई मेरठ से पधारे श्रीकांत श्री अपनी कविता के माध्यम से शहीदों को नमन करते हुए कहा –
‘कर रहा हूं देश के इतिहास को नमन।
जो प्राणों को ले हाथ में अनंत तक लड़े,
मां भारती के लाडले सुभाषको नमन।।’
सोमेश्वर पांडे जी ने पंजाबी में राष्ट्रभक्ति के जोशपूर्ण कविता पढ़ी। नैनीताल से आई कवयित्री दीपिका वर्मा ने अपने श्रृंगार रस के गीत से खूब तालियां बटोरी जौनसार से आए कवि नंदलाल भारती ने अपनी जौनसारी कविता के माध्यम से जौनसार बाबर की संस्कृति को उजागर किया उत्तरकाशी से पधारे कवि राजवीर सिंह ने रंवालटी भाषा में अपनी कविता के माध्यम से शहीदों को याद किया।
प्रवासी कवियत्री मंजू श्रीवास्तव (अमेरिका) ने अपनी कविता की माध्यम से देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों को नमन किया। विकास नगर से आएं कवि पुष्पेंद्र त्यागी ने स्वतंत्रता सेनानी यो की याद में अपनी कविता पढ़ी।
कविताओं में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, संविधान की गरिमा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावनाएँ प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त हुईं।
कवि सम्मेलन में उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का वातावरण देशप्रेम की भावना से सराबोर रहा और गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यह आयोजन प्रेरणा एवं गौरव का प्रतीक बना। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार मुख्य अतिथि सुरेंद्र दत्त सेमल्टी,अध्यक्ष कमलेश्वरी मिश्रा ने ने भी अपनी कविताएं पढ़ी।
हिमालय विरासत न्यास की अध्यक्ष डॉ. आशना कंडियाल नेगी ने सभी उपस्थित कविगणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा प्राप्त होती है। कवि सम्मेलन का संचालन भारती आनंद ‘अनन्ता’ ने किया।

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