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सीएम धामी ने बाल विवाह मुक्ति रथ का किया फ्लैग ऑफ: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ करेगा जागरूक

समर्पण सोसाइटी फॉर हेल्थ रिसर्च एंड डेवलपमेंट द्वारा देहरादून से राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में समर्पण सोसाइटी फॉर हेल्थ रिसर्च एंड डेवलपमेंट द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्ति रथ का फ्लैग ऑफ किया। यह रथ दूरस्थ, ग्रामीण और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रवाना किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान समयबद्ध, सघन और प्रभावी संदेश जन-जन तक पहुँचाने का काम करेगा। रथ के माध्यम से विभिन्न गाँवों, शहरी बस्तियों, स्कूलों, पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्थलों में नुक्कड़ नाटक, संवाद सत्र, शपथ कार्यक्रम, परामर्श शिविर, IEC सामग्री वितरण और जनसंवाद जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

यह अभियान 24 जनवरी 2026 से 08 मार्च 2026 तक चलेगा और इसका उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को रोकना है।

संस्था वर्तमान में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए 100 दिवसीय सघन अभियान (100 Days Intensive Campaign) के अंतर्गत निरंतर सामुदायिक स्तर पर गतिविधियाँ आयोजित कर रही है, जिनका सकारात्मक प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
इसी क्रम में, भारत सरकार के बाल विवाह उन्मूलन अभियान तथा Just Right to Children अभियान के अंतर्गत 1,00,000 गाँवों को बाल विवाह मुक्त बनाने के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप, जिला स्तर पर इस अभियान को प्रभावी रूप से लागू करने हेतु “बाल विवाह मुक्ति रथ” का शुभारंभ किया गया।
रास्ट्रीय बालिका दिवस पर दिनांक 24 जनवरी 2026 को माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री पुष्कर सिंह धामी जी द्वारा देहरादून से “बाल विवाह मुक्ति रथ” को फ्लैग ऑफ कर विधिवत शुभारंभ किया गया। माननीय मुख्यमंत्री द्वारा कहा गया की यह रथ एक चलित जन-जागरूकता अभियान के रूप में कार्य करेगा, जिसका उद्देश्य दूरस्थ, ग्रामीण एवं उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों तक पहुँच बनाकर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध समयबद्ध, सघन एवं प्रभावी संदेश जन-जन तक पहुँचाना है।
यह अभियान 24 जनवरी 2026 से 08 मार्च 2026 तक संचालित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत विभिन्न गाँवों, शहरी बस्तियों, स्कूलों, पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं सामुदायिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटक, संवाद सत्र, शपथ कार्यक्रम, परामर्श शिविर, IEC सामग्री वितरण तथा जनसंवाद जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
कार्यक्रम में डॉ. गीता खन्ना, अध्यक्ष, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की गई। अपने संबोधन में डॉ. गीता खन्ना ने बाल विवाह को एक गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि “बाल विवाह केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके उन्मूलन हेतु सभी विभागों, पंचायतों, स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।”
उन्होंने बाल विवाह मुक्ति रथ को एक अत्यंत सकारात्मक और प्रभावशाली पहल बताते हुए सभी विभागों से इस अभियान में सहयोग की अपेक्षा की।

इस अवसर पर कार्यक्रम में निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं उनकी टीम, चाइल्डलाइन, नागरिक सुरक्षा की टीम, ग्रास रूट संस्था देहरादून के प्रतिनिधि, आसरा ट्रस्टके प्रिनिधि, जिला बाल विवाह प्रतिषेद अधिकारी व् टीम एसोसिएशन फॉर वोलेंट्री एक्शन व् विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने प्रतिभाग किया। समर्पण संस्था की सम्पूर्ण जस्ट राईट टीम कार्यक्रम में उपस्थित रही l
समर्पण सोसाइटी द्वारा यह अभियान बाल संरक्षण, बाल अधिकारों की रक्षा, किशोरियों के सशक्तिकरण एवं सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। संस्था का मानना है कि सरकार, प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही प्रदेश व् भारतवर्ष को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है।
बाल विवाह मुक्ति रथ न केवल जागरूकता का माध्यम बनेगा, बल्कि यह समाज में सकारात्मक संवाद, व्यवहार परिवर्तन एवं बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता को भी सशक्त करेगा।

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