आज धरना स्थल में मनाया गया विश्व पर्वत दिवस हमें याद दिलाता है कि यदि पर्वत असुरक्षित हैं, तो पूरा भारत देश असुरक्षित है। विश्व पर्वत दिवस पर उत्तराखंड के नर्सिंग साथियों को बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होंने “गढ़ सेवा” की पहल स्वीकार की औऱ समर्थन दिया। पर्वत केवल भूगोल का हिस्सा नहीं हैं हमारी सभ्यता, संस्कृति, जल, जंगल और जनजीवन की बुनियाद हैं।
पर्वत दिवस पर गढ़ सेवा संगठन द्वारा एकता विहार में आयोजित कार्यक्रम में संयुक्त नागरिक संगठन के प्रतिनिधि उमेश्वर सिंह रावत तथा सुशील त्यागी का कहना था कि उत्तराखंड के पहाड़ों और वन भूमि के हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में भू माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। वन भूमि के हजारों सीमांकन पिलर ही भूमाफिया ने गायब कर दिए।अफसोस इस बात का है कि जब ईमानदार वन अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की जांच में यह तथ्य साबित हो जाता है तब इन्हीं की जांच पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए दूसरी जांच में इन पिलर्स को मात्र क्षतिग्रस्त होना बताकर जांच ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है जो भ्रष्टाचार का खुला उदाहरण है। उनकी मांग है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर प्रस्तावित हजारों पेड़ों केकटान पर तत्काल रोक लगाई जाए। मानव वन्यजीव संघर्ष के बुनियादी कारणों पर योजनाएं बनाकर वन्यजीवों के प्राकृतिक निवास वनों में फलदार पेड़ों को बड़े पैमाने पर लगाया जाए। अन्यथा पशु पक्षियों वन्यजीवों के प्राकृतिक निवास वनों के घटते क्षेत्रफल के कारण ये जीव नरभक्षी होकर पहाड़ के गांवों की ओर भूखे होकर पहाड़ के गांवों में मानव वन्यजीव संघर्ष को व्यापक बनाएंगे। उत्तराखंड की शांत वादियों में शूटरों की गोलियों से गुलदार मारे जाते रहने का क्रम आगे बढ़ता जाएगा। मानव के जीवन पर संकट को कुछ लाख रूपयों में फिर वापस नहीं लाया जा सकेगा।वहा फैलते डर का माहौल भविष्य में पलायन की समस्या को और अधिक व्यापक बनाने जा रहा है।इसलिए धामी सरकार को तत्काल फैसले लेने होंगे।
वैसे पहाड़ कोई पहाड़ा नहीं है जो तोते की तरह रट लिया जाए, पहाड़ विराट है पहाड़ अभी शांत है हरे कृष्णा ✒️
सचिन थपलियाल
पूर्व छात्रसंघ महासचिव
डीएवी कॉलेज देहरादून
